नई दिल्ली: राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा, अशोक मित्तल और संदीप पाठकने शुक्रवार को आम आदमी पार्टी (AAP) से इस्तीफा देकर बीजेपी का दामन थाम लिया। इस घटनाक्रम को अरविंद केजरीवाल के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है।
तीनों नेता 2022 से AAP के राज्यसभा सदस्य के रूप में कार्य कर रहे थे। नई दिल्ली में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में राघव चड्ढा ने संदीप पाठक और अशोक मित्तल के साथ यह ऐलान किया।
‘हम सही जगह पर नहीं थे’ — राघव चड्ढा
राघव चड्ढा ने कहा, “मैंने अपनी 15 साल की युवा ऊर्जा इस पार्टी को दी। लेकिन अब यह पार्टी अपने मूल सिद्धांतों, मूल्यों और नैतिकता से भटक चुकी है। यह अब देशहित के बजाय व्यक्तिगत हितों के लिए काम कर रही है। मुझे लंबे समय से लग रहा था कि मैं सही व्यक्ति हूं, लेकिन गलत पार्टी में हूं।”
उन्होंने आगे कहा कि वे AAP से अलग होकर जनता के बीच जाने का निर्णय ले चुके हैं।
संविधान के प्रावधान के तहत विलय का दावा
चड्ढा ने बताया कि राज्यसभा में AAP के दो-तिहाई सांसदों ने संविधान के प्रावधानों का उपयोग करते हुए BJP में विलय का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा, “हम, AAP के राज्यसभा के दो-तिहाई सांसद, संविधान के प्रावधानों का पालन करते हुए भारतीय जनता पार्टी में विलय कर रहे हैं।”
राजनीतिक असर और आगे की रणनीति
इस घटनाक्रम से AAP की संसदीय ताकत पर असर पड़ सकता है, खासकर राज्यसभा में। वहीं BJP के लिए यह एक महत्वपूर्ण राजनीतिक बढ़त मानी जा रही है।

