नई दिल्ली: भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, जहाँ समानता और प्रतिनिधित्व को संविधान का मूल आधार माना गया है। आज़ादी के बाद से देश की राजनीति में महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ी है। पंचायत से लेकर संसद और राज्यों की सत्ता तक महिलाओं ने अपनी मज़बूत मौजूदगी दर्ज कराई है। इसके बावजूद, जब देश के सर्वोच्च संवैधानिक और राजनीतिक पदों की बात आती है, तो महिला प्रतिनिधित्व अब भी सीमित दिखाई देता है। राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री जैसे अहम पदों पर महिलाओं की भागीदारी की पूरी जानकारी इस रिपोर्ट में प्रस्तुत है।
राष्ट्रपति पद: सर्वोच्च संवैधानिक जिम्मेदारी और महिला नेतृत्व
भारत के सर्वोच्च संवैधानिक पद राष्ट्रपति पर अब तक दो महिलाओं ने कार्य किया है।
वर्ष 2007 में प्रतिभा देवीसिंह पाटिल भारत की पहली महिला राष्ट्रपति बनीं। उनका कार्यकाल 2012 तक रहा। उनके राष्ट्रपति बनने को भारतीय राजनीति में महिला सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम माना गया।
इसके बाद वर्ष 2022 में द्रौपदी मुर्मु ने भारत की दूसरी महिला राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली। वह इस पद पर पहुँचने वाली पहली आदिवासी महिला भी हैं। इन दोनों नियुक्तियों ने यह साबित किया कि भारत में महिलाएँ सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुँचने में सक्षम हैं।
उपराष्ट्रपति पद: अब भी महिला प्रतिनिधित्व शून्य
भारत के दूसरे सबसे बड़े संवैधानिक पद उपराष्ट्रपति पर अब तक एक भी महिला नहीं पहुँच पाई है। आज़ादी के बाद से अब तक यह पद केवल पुरुषों के पास रहा है।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति देश की राजनीति में मौजूद लैंगिक असंतुलन को दर्शाती है। कई महिलाएँ इस पद के लिए उम्मीदवार तो बनीं, लेकिन अब तक कोई भी महिला उपराष्ट्रपति निर्वाचित नहीं हो सकी।
मुख्यमंत्री पद: राज्यों में महिला नेतृत्व की कहानी
भारत में अब तक लगभग 17 से 18 महिलाओं ने विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मुख्यमंत्री के रूप में कार्य किया है।
भारत की पहली महिला मुख्यमंत्री
भारत में महिला नेतृत्व की शुरुआत सुचेता कृष्णलानी ने की।
उन्होंने वर्ष 1963 में उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली और देश की पहली महिला मुख्यमंत्री बनीं। उस दौर में उनका मुख्यमंत्री बनना सामाजिक और राजनीतिक दृष्टि से एक ऐतिहासिक घटना मानी गई।
प्रमुख महिला मुख्यमंत्रियों का विस्तृत विवरण
* इंदिरा गांधी — उत्तर प्रदेश
इंदिरा गांधी ने वर्ष 1997 में उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री के रूप में कार्य किया। वह देश की पहली दलित महिला मुख्यमंत्री बनीं और सामाजिक न्याय की राजनीति को नई पहचान दी।
* जयललिता — तमिलनाडु
तमिलनाडु की राजनीति में जे. जयललिता का नाम सबसे प्रभावशाली महिला मुख्यमंत्रियों में गिना जाता है।
उन्होंने कई कार्यकालों में मुख्यमंत्री पद संभाला और राज्य की राजनीति पर दशकों तक गहरी छाप छोड़ी। उन्हें “अम्मा” के नाम से भी जाना गया।
* मायावती — उत्तर प्रदेश
मायावती ने उत्तर प्रदेश में चार बार मुख्यमंत्री के रूप में कार्य किया। वह दलित समाज से आने वाली देश की सबसे प्रभावशाली महिला नेताओं में शामिल हैं। उनका राजनीतिक सफर सामाजिक न्याय और बहुजन राजनीति का प्रतीक माना जाता है।
* ममता बनर्जी — पश्चिम बंगाल
ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल की वर्तमान और अब तक की सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाली महिला मुख्यमंत्री हैं।
उन्होंने वर्ष 2011 में वाम मोर्चा के लंबे शासन को समाप्त कर सत्ता संभाली और तब से लगातार राज्य की राजनीति में केंद्रीय भूमिका निभा रही हैं।
* वसुंधरा राजे — राजस्थान
वसुंधरा राजे राजस्थान की पहली महिला मुख्यमंत्री बनीं। उन्होंने दो कार्यकालों में राज्य की सत्ता संभाली और महिला नेतृत्व को राजस्थानी राजनीति में मजबूत आधार दिया।
* राबड़ी देवी — बिहार
राबड़ी देवी ने बिहार में वर्ष 1997 से 2005 तक मुख्यमंत्री के रूप में कार्य किया। वे ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने वाली महिलाओं के लिए राजनीति में प्रेरणा का प्रतीक बनीं।
* मेहबूबा मुफ्ती — जम्मू और कश्मीर
मेहबूबा मुफ्ती जम्मू-कश्मीर की पहली महिला मुख्यमंत्री बनीं। उनका कार्यकाल राज्य की राजनीति के सबसे संवेदनशील दौर में रहा, जिसे ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है।
अन्य महिला मुख्यमंत्रियों में शामिल
नंदिनी सत्पथी (ओडिशा)
शीला दीक्षित (दिल्ली) — लगातार तीन बार मुख्यमंत्री
आनंदीबेन पटेल (गुजरात)
ममता बनर्जी (पश्चिम बंगाल)
सुषमा स्वराज (दिल्ली – अल्पकालिक कार्यकाल)
इन सभी नेताओं ने अलग-अलग राज्यों में प्रशासनिक और राजनीतिक नेतृत्व प्रदान किया।
राज्यों में महिला मुख्यमंत्री: एक नज़र
उत्तर प्रदेश — सबसे अधिक महिला मुख्यमंत्री देने वाला राज्य
तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, राजस्थान, बिहार, दिल्ली, जम्मू-कश्मीर जैसे राज्यों में महिला मुख्यमंत्री रह चुकी हैं
उपमुख्यमंत्री पद: सीमित लेकिन बढ़ती भागीदारी
भारत में राजनीति में महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ी है, लेकिन उपमुख्यमंत्री (Deputy Chief Minister) जैसे उच्चतम राज्य-स्तरीय पद पर अब तक केवल 8 महिलाओं ने काम किया है। इनमें कुछ पहले कार्य कर चुकी हैं, तो कुछ वर्तमान में इस पद पर नियुक्त हैं। नीचे सूची क्रम से और विवरण के साथ:
राजिंदर कौर भट्टल — पंजाब
पहली महिला उपमुख्यमंत्री (6 अगस्त 1996 से 21 नवंबर 1996 तक)
राजिंदर कौर भट्टल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से थी और वह पंजाब की पहले महिला उपमुख्यमंत्री बनीं। उन्होंने बाद में मुख्यमंत्री का पद भी संभाला — यह दुर्लभ उदाहरण है जहाँ एक महिला ने दोनों पदों पर कार्य किया।
जमुना देवी — मध्य प्रदेश
उपमुख्यमंत्री (1 दिसंबर 1998 से 8 दिसंबर 2003)
जमुना देवी ने मध्य प्रदेश में सबसे लंबा उपमुख्यमंत्री का कार्यकाल निभाया — लगभग 5 वर्ष तक।
कमला बेनीवाल — राजस्थान
उपमुख्यमंत्री (25 जनवरी 2003 से 4 दिसंबर 2003)
कमला बेनीवाल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की वरिष्ठ नेता थीं। राजस्थान के उपमुख्यमंत्री के अलावा उन्होंने राज्य की राजनीति में कई जिम्मेदारियाँ निभाईं।
पामुला पुष्पा श्रीवानी — आंध्र प्रदेश
उपमुख्यमंत्री (8 जून 2019 से 7 अप्रैल 2022)
पामुला पुष्पा श्रीवानी, युर्वजन श्रमिक रयतु कांग्रेस पार्टी से, सबसे युवा महिला उपमुख्यमंत्री में से एक हैं। उन्होंने लगभग 2 साल 10 महीने तक यह पद संभाला।
रेनु देवी — बिहार
उपमुख्यमंत्री (16 नवंबर 2020 से 9 अगस्त 2022)
बीजेपी की नेता रेनु देवी बिहार की पहली महिला उपमुख्यमंत्री बनीं। उन्होंने लगभग 1 वर्ष 8 महीने इस पद पर सेवा दी।
दीया कुमारी — राजस्थान
उपमुख्यमंत्री (15 दिसंबर 2023 से वर्तमान)
राजस्थान की वर्तमान महिला उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी भाजपा से हैं और वह राज्य की सत्ता में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
प्रवाती परिदा — ओडिशा
उपमुख्यमंत्री (12 जून 2024 से वर्तमान)
ओडिशा की पहली महिला उपमुख्यमंत्री प्रवाती परिदा भाजपा से हैं। वे मुख्यमंत्री के साथ राज्य सरकार में महिला सशक्तिकरण और प्रशासनिक जिम्मेदारियाँ निभा रही हैं।
सुनेत्रा पवार — महाराष्ट्र
उपमुख्यमंत्री (31 जनवरी 2026 से वर्तमान)
सुनेत्रा पवार महाराष्ट्र की पहली महिला उपमुख्यमंत्री बनीं। वह राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी से हैं और इस पद पर शपथ ग्रहण कर राज्य की राजनीति में महिला नेतृत्व का नया अध्याय लिख रही हैं।
एक नज़र में आंकड़े
राष्ट्रपति: 2 महिलाएँ
उपराष्ट्रपति: 0 महिला
मुख्यमंत्री: लगभग 17–18 महिलाएँ
उपमुख्यमंत्री: लगभग 8 महिलाएँ

