नई दिल्ली: केंद्र सरकार द्वारा वर्ष 2014 से 2025 के बीच पेश किए गए केंद्रीय बजटों में कर व्यवस्था, सामाजिक कल्याण, बुनियादी ढांचा, एमएसएमई, एफडीआई और डिजिटल अर्थव्यवस्था पर विशेष जोर देखने को मिला।
बजट 2014-15
- आयकर छूट सीमा बढ़ाकर 2.5 लाख रुपये की गई।
- धारा 80C के तहत टैक्स छूट की सीमा 1.5 लाख रुपये।
- बीमा क्षेत्र में एफडीआई सीमा 26% से बढ़ाकर 49%।
- बुनियादी ढांचा और ग्रामीण विकास पर जोर।
बजट 2015-16
- राजकोषीय घाटा 3.9% पर लाने का लक्ष्य।
- "मेक इन इंडिया" और स्टार्टअप्स को बढ़ावा।
- कॉरपोरेट टैक्स को चरणबद्ध तरीके से 30% से 25% करने की घोषणा।
बजट 2016-17
- आयकर स्लैब में राहत, छोटे करदाताओं को फायदा।
- डिजिटल और कैशलेस अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहन।
- इंफ्रास्ट्रक्चर में रिकॉर्ड निवेश।
बजट 2017-18
- रेल बजट को सामान्य बजट में शामिल किया गया।
- डिजिटल भुगतान को बढ़ावा, भीम ऐप लॉन्च।
- ग्रामीण और कृषि क्षेत्र के लिए विशेष प्रावधान।
बजट 2018-19
- आयुष्मान भारत योजना की शुरुआत।
- किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर फोकस।
- एमएसएमई के लिए कॉरपोरेट टैक्स 25%।
बजट 2019 (अंतरिम)
- किसानों के लिए पीएम-किसान योजना।
- स्टैंडर्ड डिडक्शन बढ़ाकर 50,000 रुपये।
- पेंशनभोगियों और वेतनभोगियों को राहत।
बजट 2019-20
- इंफ्रास्ट्रक्चर और एमएसएमई सेक्टर को बढ़ावा।
- स्टार्टअप्स के लिए टैक्स राहत।
बजट 2020-21
- नई वैकल्पिक आयकर व्यवस्था की घोषणा।
- स्वास्थ्य और शिक्षा पर बढ़ा हुआ बजट।
बजट 2021-22
- पूंजीगत व्यय में ऐतिहासिक वृद्धि।
- एफडीआई सीमा रक्षा क्षेत्र में 74%।
- बैंकों और इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर।
बजट 2022-23
- 9.2% की आर्थिक वृद्धि का अनुमान।
- स्टार्टअप्स और डिजिटल इंडिया को बढ़ावा।
बजट 2023-24
- स्टैंडर्ड डिडक्शन में राहत।
- एमएसएमई और रोजगार सृजन पर फोकस।
बजट 2024 (अंतरिम)
- डीबीटी और सामाजिक योजनाओं का विस्तार।
- इंफ्रास्ट्रक्चर और हरित ऊर्जा पर निवेश।
बजट 2024-25
- युवाओं और कौशल विकास के लिए नई योजनाएं।
- कृषि और ग्रामीण विकास पर जोर।
बजट 2025-26
- कर सुधारों की निरंतरता।
- डिजिटल, ग्रीन और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में कदम।

