नई दिल्ली: रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की सरकार ने देश में लोकप्रिय मैसेजिंग प्लेटफॉर्म WhatsApp पर प्रतिबंध लगा दिया है। यह कदम रूस की इंटरनेट और ऑनलाइन कम्युनिकेशन पर पकड़ मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
रूस की सरकारी मीडिया रेगुलेटर संस्था Roskomnadzor ने मंगलवार को इस फैसले की घोषणा की। रेगुलेटर के अनुसार, WhatsApp और अन्य मैसेजिंग प्लेटफॉर्म उपयोगकर्ताओं के डेटा की सुरक्षा सुनिश्चित करने और ऑनलाइन धोखाधड़ी रोकने में विफल रहे हैं।
Telegram पर भी सख्ती, पहले भी लग चुकी हैं पाबंदियां
यह पहली बार नहीं है जब रूस ने मैसेजिंग ऐप्स पर कार्रवाई की हो। पिछले साल रूस ने WhatsApp और Telegram कॉल्स पर प्रतिबंध लगाया था। इससे दो महीने पहले Apple FaceTime पर भी रोक लगाई गई थी।
Snapchat पर भी फोटो, वीडियो और मैसेज शेयरिंग को लेकर कार्रवाई हुई थी। Roskomnadzor का दावा है कि ये प्लेटफॉर्म आपराधिक गतिविधियों के लिए इस्तेमाल किए जा रहे थे और यूजर्स के डेटा की पर्याप्त सुरक्षा नहीं कर पा रहे थे।
यूक्रेन युद्ध के बाद बढ़ा इंटरनेट कंट्रोल
2022 में यूक्रेन पर रूस के पूर्ण पैमाने के आक्रमण के बाद से मॉस्को ने इंटरनेट पर अपनी निगरानी और नियंत्रण काफी बढ़ा दिया है।
रूस पहले ही कई प्रमुख सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर प्रतिबंध लगा चुका है, जिनमें शामिल हैं:
* X (पूर्व में Twitter)
इसके अलावा, एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप Signal और लोकप्रिय ऐप Viber को भी ब्लॉक किया जा चुका है।।सरकार का कहना है कि ये प्लेटफॉर्म देश के कानूनों का पालन नहीं कर रहे थे और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बन रहे थे।
क्या है MAX App? क्यों हो रहा है प्रमोशन?
* WhatsApp बैन के साथ ही रूस सरकार एक नए स्टेट-बैक्ड मैसेंजर ऐप ‘MAX’ को बढ़ावा दे रही है।
* MAX App को रूसी टेक कंपनी VK ने विकसित किया है।
इसे पिछले साल मार्च में लॉन्च किया गया था।
*यह ऐप रूस में बिकने वाले स्मार्टफोन्स और अन्य डिवाइसेज में प्री-इंस्टॉल किया जा रहा है।
डेवलपर्स के अनुसार, MAX एक ऑल-इन-वन प्लेटफॉर्म है, जिसमें मैसेजिंग, पेमेंट्स और अन्य डिजिटल सेवाएं उपलब्ध हैं।हालांकि, आलोचकों का दावा है कि यह ऐप एक निगरानी (Surveillance) टूल के रूप में काम कर सकता है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक:
MAX App में एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन उपलब्ध नहीं है।जरूरत पड़ने पर यूजर डेटा सरकार के साथ साझा किया जा सकता है।
क्या है इस फैसले का असर?
विशेषज्ञों का मानना है कि WhatsApp बैन से रूस में डिजिटल कम्युनिकेशन का स्वरूप बदल सकता है। आम यूजर्स को वैकल्पिक प्लेटफॉर्म अपनाने पड़ेंगे। अंतरराष्ट्रीय कंपनियों और नागरिकों के बीच संवाद प्रभावित हो सकता है।
इंटरनेट स्वतंत्रता को लेकर बहस और तेज हो सकती है।

