नई दिल्ली: लद्दाख के उपराज्यपाल कविंदर गुप्ता ने गुरुवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। समाचार एजेंसी Asian News International (ANI) की रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने करीब नौ महीने तक पद संभालने के बाद यह फैसला लिया। अधिकारियों के हवाले से आई इस खबर के बाद लद्दाख के प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।
रिपोर्ट के अनुसार कविंदर गुप्ता ने इसी साल लद्दाख के उपराज्यपाल के रूप में कार्यभार संभाला था। हालांकि अभी तक उनके इस्तीफे के पीछे की आधिकारिक वजह सार्वजनिक नहीं की गई है। केंद्र सरकार की ओर से भी इस संबंध में विस्तृत बयान का इंतजार किया जा रहा है।
जम्मू-कश्मीर की राजनीति से जुड़ा रहा लंबा अनुभव
कविंदर गुप्ता का राजनीतिक करियर मुख्य रूप से जम्मू और कश्मीर से जुड़ा रहा है। वे राज्य की राजनीति में लंबे समय तक सक्रिय रहे और कई महत्वपूर्ण पदों पर काम कर चुके हैं।
वह पहले जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री भी रह चुके हैं। इसके अलावा वे विधानसभा अध्यक्ष जैसे पदों पर भी कार्य कर चुके हैं। प्रशासनिक अनुभव और राजनीतिक पृष्ठभूमि के कारण उन्हें लद्दाख के उपराज्यपाल की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।
लद्दाख में प्रशासनिक जिम्मेदारी
लद्दाख को वर्ष 2019 में केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा मिलने के बाद यहां उपराज्यपाल का पद प्रशासनिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इस पद पर नियुक्त व्यक्ति केंद्र सरकार की ओर से क्षेत्र के प्रशासन, विकास योजनाओं और नीति क्रियान्वयन की निगरानी करता है।
जब कविंदर गुप्ता ने पदभार संभाला था, तब उनसे उम्मीद की जा रही थी कि वे लद्दाख में विकास योजनाओं को गति देने और प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएंगे। हालांकि नौ महीने बाद उनके अचानक इस्तीफे की खबर सामने आने से राजनीतिक हलकों में कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं।
आधिकारिक घोषणा का इंतजार
फिलहाल केंद्र सरकार की ओर से यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया है या नहीं, और अगला उपराज्यपाल कौन होगा। माना जा रहा है कि जल्द ही सरकार इस संबंध में आधिकारिक घोषणा कर सकती है।

