लफबरो (ब्रिटेन): अगर आप रोज़ाना सीमित मात्रा में कॉफी पीते हैं, तो यह आपकी उम्र बढ़ने के साथ दिमागी सेहत के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है। वैज्ञानिकों के एक बड़े शोध में सामने आया है कि दिन में दो से तीन कप कॉफी या चाय पीने से डिमेंशिया का जोखिम उल्लेखनीय रूप से घट सकता है।
43 साल तक चला अध्ययन
इस अध्ययन में अमेरिका की 1,31,000 से अधिक नर्सों और स्वास्थ्य पेशेवरों को शामिल किया गया। शोधकर्ताओं ने प्रतिभागियों के स्वास्थ्य पर करीब 43 वर्षों तक नजर रखी। इस दौरान लगभग 11,000 लोगों में डिमेंशिया के लक्षण पाए गए।
हालांकि, जो लोग नियमित रूप से सीमित मात्रा में कैफीन लेते थे, उनमें डिमेंशिया होने की संभावना कम देखी गई।
35% तक घटा जोखिम
शोध के मुताबिक, रोज़ाना 250 से 300 मिलीग्राम कैफीन (जो लगभग 2–3 कप कॉफी के बराबर है) लेने वालों में डिमेंशिया का खतरा करीब 35 प्रतिशत तक कम पाया गया।विशेष रूप से 75 वर्ष से कम उम्र के लोगों में इसका प्रभाव ज्यादा स्पष्ट था।
ज्यादा कैफीन से नहीं मिलता अतिरिक्त फायदा
वैज्ञानिकों ने यह भी साफ किया कि इससे अधिक कैफीन लेने पर दिमाग को कोई अतिरिक्त लाभ नहीं मिलता। उल्टा, ज्यादा कैफीन नींद की समस्या और चिंता को बढ़ा सकता है, जो मस्तिष्क स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है।
डिकैफ कॉफी और तेज़ स्मृति क्षय
अध्ययन में यह भी देखा गया कि कैफीन रहित (डिकैफ) कॉफी पीने वालों में स्मृति क्षय अपेक्षाकृत तेज़ था। शोधकर्ताओं का मानना है कि कई लोग नींद की परेशानी, हाई ब्लड प्रेशर या हृदय रोग के कारण डिकैफ कॉफी अपनाते हैं, और ये समस्याएं खुद भी संज्ञानात्मक गिरावट से जुड़ी होती हैं।
दिमाग पर कैसे असर डालता है कैफीन?
शोध के अनुसार, कैफीन मस्तिष्क में मौजूद एडेनोसिन नामक रसायन को रोकता है। इससे डोपामिन और एसिटाइलकोलाइन जैसे न्यूरोट्रांसमीटर अधिक सक्रिय रहते हैं, जो याददाश्त और सोचने की क्षमता के लिए ज़रूरी हैं। उम्र बढ़ने और अल्ज़ाइमर जैसी बीमारियों में इन रसायनों की सक्रियता घटने लगती है, जिसे कैफीन कुछ हद तक संतुलित कर सकता है।
संतुलन है सबसे ज़रूरी
शोधकर्ताओं ने यर्क्स–डॉडसन नियम का हवाला देते हुए कहा कि अत्यधिक उत्तेजना मस्तिष्क को नुकसान पहुंचा सकती है। यानी कम मात्रा में कैफीन फायदेमंद, लेकिन बहुत ज्यादा मात्रा उल्टा असर डाल सकती है।
अन्य अध्ययनों से भी मिली पुष्टि
38 अन्य शोधों के विश्लेषण में भी यह निष्कर्ष सामने आया कि कैफीन लेने वालों में डिमेंशिया का खतरा 6 से 16 प्रतिशत तक कम होता है। इनमें भी एक से तीन कप कॉफी को सबसे उपयुक्त मात्रा बताया गया।
‘कप’ का मतलब हर जगह अलग
वैज्ञानिकों ने यह भी स्पष्ट किया कि कॉफी में कैफीन की मात्रा उसके प्रकार और बनाने के तरीके पर निर्भर करती है। इसलिए ज़रूरी है कि लोग मध्यम मात्रा में ही कैफीन का सेवन करें।

