नागपुर: राज्यसभा चुनाव से ठीक पहले भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने एक चौंकाने वाला फैसला लेते हुए नागपुर की माया इवनाते को राज्यसभा के लिए उम्मीदवार घोषित कर दिया है। इससे पहले पार्टी की ओर से नए नामों को लेकर चर्चा जोरों पर थी, लेकिन अंतिम समय में माया इवनाते के नाम पर मुहर लगने से राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है।
कौन हैं माया इवनाते?
माया इवनाते नागपुर की पूर्व महापौर रह चुकी हैं और वर्तमान में नगर निगम की निर्वाचित पार्षद हैं। हाल ही में हुए स्थानीय निकाय चुनाव में उन्होंने जीत दर्ज की थी। आदिवासी समाज की प्रभावशाली महिला नेता के रूप में उनकी पहचान मजबूत मानी जाती है।
उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर भी अहम जिम्मेदारियां निभाई हैं। वे अनुसूचित जनजाति के राष्ट्रीय आयोग की सदस्य के रूप में कार्य कर चुकी हैं। ऐसे में राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा आदिवासी समाज से महिला प्रतिनिधित्व को बढ़ावा देने की रणनीति पर काम कर रही है।
अन्य उम्मीदवारों की भी घोषणा
माया इवनाते के साथ-साथ भाजपा ने रामदास आठवले, विनोद तावड़े, रामराव वड़कुते को भी राज्यसभा के लिए उम्मीदवार घोषित किया है।
नामांकन और राजनीतिक हलचल
राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि गुरुवार (5 तारीख) निर्धारित की गई है, जबकि नाम वापसी की आखिरी तारीख शनिवार (7 तारीख) है। ऐसे में आने वाले दिनों में महाराष्ट्र की राजनीति में गतिविधियां और तेज होने की संभावना है।
द्रौपदी मुर्मू से नजदीकी चर्चा में
राजनीतिक चर्चाओं के मुताबिक माया इवनाते को द्रौपदी मुर्मू का करीबी माना जाता है। आदिवासी समाज के प्रतिनिधित्व को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत करने की दिशा में भाजपा का यह कदम अहम माना जा रहा है।
बीजेपी की रणनीति और बदलते समीकरण
राज्यसभा चुनाव 2026 को देखते हुए भाजपा का यह फैसला सामाजिक समीकरणों को साधने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। खासकर आदिवासी और महिला मतदाताओं के बीच मजबूत संदेश देने की कोशिश के तौर पर इसे देखा जा रहा है।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि इस अप्रत्याशित फैसले से राज्यसभा चुनाव में नए समीकरण बन सकते हैं और विपक्षी दलों की रणनीति पर भी असर पड़ सकता है।

