पटना: बिहार की राजनीति में लंबे समय से प्रभावशाली भूमिका निभाने वाले नीतीश कुमार को राज्य के सबसे अनुभवी नेताओं में गिना जाता है। कई बार बिहार के मुख्यमंत्री रह चुके नीतीश कुमार अपने प्रशासनिक फैसलों, विकास योजनाओं और गठबंधन राजनीति के लिए देशभर में चर्चा में रहे हैं।
नीतीश कुमार का जन्म 1 मार्च 1951 को बिहार के पटना जिले के बख्तियारपुर में हुआ था। उनके पिता रामलखन सिंह आयुर्वेदिक चिकित्सक होने के साथ-साथ स्वतंत्रता आंदोलन से भी जुड़े रहे। नीतीश कुमार ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा बिहार में ही प्राप्त की और बाद में पटना के National Institute of Technology Patna (तत्कालीन बिहार कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग) से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की।
राजनीति में उनका प्रवेश 1970 के दशक में हुआ। उस समय देश में चल रहे जन आंदोलन और सामाजिक बदलावों ने उन्हें काफी प्रभावित किया। उन्होंने जेपी आंदोलन में सक्रिय भाग लिया, जिसका नेतृत्व समाजवादी नेता जयप्रकाश नारायण कर रहे थे। इसी आंदोलन ने उनके राजनीतिक करियर की नींव रखी।
नीतीश कुमार पहली बार 1985 में बिहार विधानसभा के लिए चुने गए। इसके बाद वे राष्ट्रीय राजनीति में भी सक्रिय हो गए और कई बार लोकसभा के सदस्य बने। केंद्र की राजनीति में उन्होंने महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं। पूर्व प्रधानमंत्री Atal Bihari Vajpayee की सरकार में उन्होंने रेल मंत्री, कृषि मंत्री और सतह परिवहन मंत्री जैसे अहम पदों पर कार्य किया।
बिहार की राजनीति में उनकी सबसे बड़ी पहचान मुख्यमंत्री के रूप में बनी। वर्ष 2005 में वे पहली बार बिहार के मुख्यमंत्री बने और उसके बाद कई बार इस पद की जिम्मेदारी संभाली।
उनके नेतृत्व में राज्य में सड़क, बिजली, शिक्षा और कानून-व्यवस्था के क्षेत्र में कई सुधारों की चर्चा हुई। लड़कियों को स्कूल जाने के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से शुरू की गई साइकिल योजना को काफी लोकप्रियता मिली। इसके अलावा वर्ष 2016 में बिहार में शराबबंदी लागू करने का फैसला भी उनके प्रमुख और चर्चित निर्णयों में से एक रहा।
नीतीश कुमार की राजनीति का एक महत्वपूर्ण पहलू गठबंधन बदलने की रणनीति भी रही है। उनकी पार्टी जनता दल (United) ने समय-समय पर अलग-अलग दलों के साथ मिलकर सरकार बनाई है। इनमें भारतीय जनता पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल, कांग्रेस जैसे प्रमुख दल शामिल हैं। इसी कारण उन्हें भारतीय राजनीति में गठबंधन प्रबंधन के माहिर नेताओं में गिना जाता है।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार नीतीश कुमार की छवि एक ऐसे नेता की रही है जो विकास और प्रशासनिक सुधारों पर जोर देते हैं। बिहार में कानून-व्यवस्था और बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने के प्रयासों के कारण उन्हें “सुशासन बाबू” के नाम से भी जाना जाता है।
आज भी नीतीश कुमार बिहार की राजनीति में एक महत्वपूर्ण और प्रभावशाली नेता माने जाते हैं। लंबे राजनीतिक अनुभव और बदलते राजनीतिक समीकरणों के बीच उनकी भूमिका राज्य और राष्ट्रीय राजनीति दोनों में महत्वपूर्ण बनी हुई है।

