वॉशिंगटन/काहिरा: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए लगभग सात देशों से युद्धपोत भेजने की अपील की है। उनका कहना है कि वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए इस अहम समुद्री मार्ग को हर हाल में खुला रखना जरूरी है।
हालांकि ईरान-इजराइल संघर्ष और तेल की बढ़ती कीमतों के बावजूद अब तक किसी भी देश ने इस प्रस्ताव पर औपचारिक प्रतिबद्धता नहीं जताई है। ट्रंप ने उन देशों के नाम सार्वजनिक नहीं किए, जिनसे इस मुद्दे पर बातचीत चल रही है।
वैश्विक तेल व्यापार के लिए अहम समुद्री मार्ग
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में गिना जाता है। वैश्विक व्यापारिक कच्चे तेल का लगभग पांचवां हिस्सा इसी मार्ग से होकर गुजरता है। ऐसे में क्षेत्र में बढ़ता तनाव अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार और वैश्विक व्यापार के लिए चिंता का कारण बन गया है।
एयर फोर्स वन विमान से वाशिंगटन लौटते समय पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने कहा कि जिन देशों की अर्थव्यवस्था पश्चिम एशिया के तेल पर निर्भर है, उन्हें इस मार्ग की सुरक्षा के लिए आगे आना चाहिए।
उन्होंने कहा, “मैं इन देशों से कह रहा हूं कि वे आगे आएं और अपने क्षेत्र की सुरक्षा करें, क्योंकि यह उनका ही क्षेत्र है।” ट्रंप के अनुसार अमेरिका को इस मार्ग से अपेक्षाकृत कम तेल मिलता है, जबकि चीन को बड़ी मात्रा में तेल इसी रास्ते से प्राप्त होता है।
कई देशों से पहले भी की जा चुकी है अपील
रिपोर्टों के अनुसार ट्रंप इससे पहले चीन, फ्रांस, जापान, दक्षिण कोरिया और ब्रिटेन जैसे देशों से भी इस समुद्री सुरक्षा पहल में शामिल होने की अपील कर चुके हैं। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि चीन इस प्रस्तावित गठबंधन का हिस्सा बनेगा या नहीं।
ईरान का दावा—कई देशों ने संपर्क किया
इस बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि कई देशों ने अपने जहाजों की सुरक्षित आवाजाही के लिए तेहरान से संपर्क किया है। उनके मुताबिक कुछ देशों के जहाजों को गुजरने की अनुमति भी दी गई है, हालांकि अंतिम निर्णय ईरान के सैन्य अधिकारियों द्वारा लिया जाता है।
ईरान ने यह भी कहा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य सभी देशों के लिए खुला है, लेकिन अमेरिका और उसके सहयोगियों के लिए नहीं।
अमेरिका से बातचीत की संभावना से इनकार
अराघची ने युद्ध समाप्त करने के लिए अमेरिका से बातचीत की संभावना को भी खारिज कर दिया। उनका आरोप है कि 28 फरवरी को ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर चल रही अप्रत्यक्ष वार्ता के बीच अमेरिका और इजराइल ने समन्वित हमले करके इस संघर्ष की शुरुआत की थी।
क्षेत्र में बढ़ता जा रहा संघर्ष
संघर्ष का असर पूरे मध्य-पूर्व में दिखाई दे रहा है। International Committee of the Red Cross के अनुसार ईरान में अब तक 1300 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें बड़ी संख्या में महिलाएं और बच्चे शामिल हैं।
वहीं इजराइल में ईरानी मिसाइल हमलों में कम से कम 12 लोगों की जान गई है। इसके अलावा लेबनान में ईरान समर्थित हिजबुल्ला और इजराइल के बीच जारी संघर्ष में 820 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और लाखों लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हुए हैं।
इजराइल पर फिर मिसाइल हमला
सोमवार तड़के ईरान ने एक बार फिर इजराइल की ओर मिसाइलें दागीं, जिससे मध्य इजराइल और तेल अवीव क्षेत्र में कई जगह नुकसान हुआ। इजराइली सेना का दावा है कि ईरान क्लस्टर बमों का इस्तेमाल कर रहा है, जो हवा में फटकर कई छोटे विस्फोटक गिराते हैं और हवाई रक्षा प्रणालियों को भी चुनौती देते हैं।

