नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने कश्मीर के अलगाववादी नेता शब्बीर अहमद शाह को आतंकवाद के वित्तपोषण से जुड़े मामले में गुरुवार को जमानत दे दी। शाह को राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) ने 4 जून 2019 को इस मामले में गिरफ्तार किया था और वह तब से न्यायिक हिरासत में थे।
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए शाह को जमानत देने का आदेश दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि जमानत कुछ सख्त शर्तों के साथ दी जाएगी, जिनकी विस्तृत जानकारी बाद में जारी आदेश में दी जाएगी।सुनवाई के दौरान शाह की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कॉलिन गोंसाल्वेस ने पक्ष रखा, जबकि एनआईए की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा अदालत में पेश हुए।
दरअसल, शब्बीर अहमद शाह ने दिल्ली हाईकोर्ट के 12 जून 2024 के उस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, जिसमें उन्हें जमानत देने से इनकार कर दिया गया था। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने 4 सितंबर 2024 को शाह की अंतरिम जमानत याचिका भी खारिज कर दी थी और एनआईए से जवाब मांगा था।
दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि आरोपी के खिलाफ गंभीर आरोप हैं और इस बात की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता कि वह रिहा होने पर गवाहों को प्रभावित कर सकता है या फिर समान गैरकानूनी गतिविधियों में शामिल हो सकता है।
एनआईए ने वर्ष 2017 में इस मामले में 12 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया था। जांच एजेंसी का आरोप है कि इन लोगों ने जम्मू-कश्मीर में पथराव, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और सरकार के खिलाफ साजिश रचने के लिए धन जुटाने में भूमिका निभाई थी।एनआईए के मुताबिक, शब्बीर अहमद शाह ने जम्मू-कश्मीर में अलगाववादी गतिविधियों को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभाई थी और इसी वजह से उन्हें इस मामले में मुख्य आरोपियों में शामिल किया गया।

