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विदर्भ के वरिष्ठ नेता दत्ता मेघे का निधन, 89 वर्ष की आयु में ली अंतिम सांस

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Puja Nitnaware
Published in General
विदर्भ के वरिष्ठ नेता दत्ता मेघे का निधन, 89 वर्ष की आयु में ली अंतिम सांस

विदर्भ क्षेत्र के वरिष्ठ नेता, शिक्षाविद और समाजसेवी दत्ता राघोबाजी मेघे का आज रात को निधन हो गया।

नागपुर: विदर्भ क्षेत्र के वरिष्ठ नेता, शिक्षाविद और समाजसेवी दत्ता राघोबाजी मेघे का आज रात को निधन हो गया। वह 89 वर्ष के थे। उनके निधन से महाराष्ट्र की राजनीति, शिक्षा और सामाजिक क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है।

करीब चार दशकों से अधिक समय तक सार्वजनिक जीवन में सक्रिय रहे दत्ता मेघे ने राजनीति, शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनके निधन पर केंद्रीय मंत्री नितीन गडकरी और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस सहित कई दिग्गज नेताओं ने गहरा दुख व्यक्त किया है।

लंबा राजनीतिक सफर और मजबूत पकड़

दत्ता मेघे का राजनीतिक सफर बेहद प्रभावशाली रहा। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत कांग्रेस पार्टी से की और वर्धा लोकसभा क्षेत्र से चार बार सांसद चुने गए। इसके अलावा, उन्होंने लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों में सदस्य के रूप में कार्य किया। वह तीन बार विधान परिषद के सदस्य भी रहे।

1991 में उन्होंने नागपुर लोकसभा सीट से कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में जीत दर्ज की। इसके बाद 1996 में रामटेक और 1998 में वर्धा से सांसद बने। वह विदर्भ के ऐसे एकमात्र नेता थे जो तीन अलग-अलग लोकसभा क्षेत्रों से चुनाव जीतने में सफल रहे।

2014 में बीजेपी में शामिल हुए

राजनीति में लंबे समय तक कांग्रेस से जुड़े रहने के बाद, वर्ष 2014 में उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का दामन थाम लिया। इसके बाद वह पार्टी की रणनीतियों और चुनावी गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाते रहे।

इससे पहले 1978 में शरद पवार के नेतृत्व वाली सरकार में वह मंत्री भी रहे थे। यही उनके सक्रिय राजनीतिक जीवन की शुरुआत मानी जाती है।

शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़ा योगदान

दत्ता मेघे ने केवल राजनीति ही नहीं, बल्कि शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में भी उल्लेखनीय कार्य किया। उन्होंने वर्धा के सावंगी (मेघे) में मेडिकल कॉलेज और अस्पताल की स्थापना की, जिससे विदर्भ क्षेत्र के हजारों लोगों को लाभ मिला।

उन्होंने कई शैक्षणिक संस्थानों की स्थापना कर क्षेत्र के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। गरीब परिवार से आने के बावजूद उन्होंने अपने सौम्य स्वभाव और मृदुभाषी व्यक्तित्व से जनता के बीच खास पहचान बनाई।

नितीन गडकरी के साथ गहरा संबंध

दत्ता मेघे और नितीन गडकरी के बीच गहरी मित्रता और विश्वास का रिश्ता था। बताया जाता है कि अपने जीवनकाल में ही मेघे ने सार्वजनिक रूप से यह खुलासा किया था कि उन्होंने अपने वसीयतनामा में गडकरी का नाम शामिल किया है, ताकि भविष्य में किसी प्रकार की कानूनी जटिलता न उत्पन्न हो।

समर्थकों में शोक की लहर

रात करीब साढ़े आठ बजे उनके निधन की खबर सामने आते ही उनके समर्थकों और चाहने वालों में शोक की लहर फैल गई। दत्ता मेघे ने अपने जीवन में कई कार्यकर्ताओं को तैयार किया और विदर्भ की राजनीति में एक मजबूत पहचान बनाई।

Tags:#Datta Meghe#Passes away#Nagpur news#Maharashtra news

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