मकर संक्रांति का पर्व भारत में बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। इस दिन दान-पुण्य, स्नान और विशेष भोजन का महत्व होता है। खासतौर पर संक्रांति के दिन खिचड़ी खाने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसके पीछे सिर्फ धार्मिक नहीं बल्कि आयुर्वेदिक और मौसमी कारण भी हैं? आइए विस्तार से जानते हैं।
सूर्य और मकर संक्रांति का धार्मिक महत्व
मकर संक्रांति के दिन सूर्य देव धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं। इसे सूर्य का उत्तरायण होना कहा जाता है, जिसे हिंदू धर्म में अत्यंत शुभ माना गया है। इस दिन सात्विक और हल्का भोजन करने की परंपरा है, और खिचड़ी को सबसे पवित्र आहार माना जाता है।
आयुर्वेद के अनुसार क्यों फायदेमंद है खिचड़ी?
आयुर्वेद के अनुसार संक्रांति के समय मौसम में बदलाव होता है, जिससे पाचन तंत्र प्रभावित हो सकता है।
*खिचड़ी आसानी से पचने वाला भोजन है
*यह शरीर को गर्म रखती है
*पोषण से भरपूर होती है
यही कारण है कि इसे डिटॉक्स फूड भी कहा जाता है।
संक्रांति पर खिचड़ी दान का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मकर संक्रांति पर खिचड़ी का दान करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।
मान्यता है कि इससे:
*सूर्य दोष शांत होता है
*पितृ दोष से मुक्ति मिलती है
*जीवन में सुख-समृद्धि आती है
उत्तर भारत में तो इस दिन को खिचड़ी पर्व के रूप में भी मनाया जाता है।
नई फसल से जुड़ी परंपरा
मकर संक्रांति नई फसल के आगमन का उत्सव है। नई फसल के चावल और दाल से बनी खिचड़ी खाना प्रकृति और अन्नदाता किसान के प्रति आभार व्यक्त करने का प्रतीक है।
सात्विक भोजन और मानसिक शांति
खिचड़ी को सात्विक भोजन माना जाता है, जो मन को शांत और शरीर को संतुलित रखता है। यही वजह है कि धार्मिक अवसरों पर इसे प्राथमिक भोजन के रूप में ग्रहण किया जाता है।

