प्राचीन आयुर्वेदिक वैद्यों ने सदियों पहले ही हल्दी की ताकत को पहचान लिया था। आज वही हल्दी दुनियाभर के कैफे में “गोल्डन मिल्क” के रूप में छाई हुई है। लेकिन सवाल ये है—क्या यह सुनहरा मसाला वाकई उतना ही फायदेमंद है, जितना कहा जाता है?
हल्दी को कहीं इंडियन सैफ्रन, कहीं येलो रूट तो कहीं सिर्फ टर्मरिक कहा जाता है। नाम चाहे जो हो, इसके फायदे अनेक हैं। यह चमकीली पीली जड़ दक्षिण एशिया से आती है और सदियों से आयुर्वेद पारंपरिक चीनी चिकित्सा (TCM) और रसोई में प्राकृतिक रंग व मसाले के रूप में इस्तेमाल होती आ रही है।
भारत है हल्दी का सबसे बड़ा केंद्र
हल्दी का सबसे बड़ा उत्पादक देश भारत है, जो दुनिया की लगभग पूरी हल्दी पैदा करता है और करीब 80% वैश्विक खपत भी यहीं होती है। यूरोप में पहले हल्दी को सिर्फ करी पाउडर या प्राकृतिक फूड कलर (E100) के रूप में जाना जाता था, लेकिन अब नेचुरल हेल्थ और होलिस्टिक न्यूट्रिशन के बढ़ते ट्रेंड ने हल्दी को वेलनेस सुपरस्टार बना दिया है।
हल्दी का असली हीरो: करक्यूमिन
हल्दी में पाया जाने वाला मुख्य तत्व है करक्यूमिन (Curcumin)—जो इसके पीले रंग और औषधीय गुणों के लिए जिम्मेदार है। वैज्ञानिकों के अनुसार करक्यूमिन में दो खास खूबियां होती हैं:
*एंटीऑक्सीडेंट
*एंटी-इंफ्लेमेटरी (सूजन कम करने वाला)
यह शरीर में मौजूद फ्री रेडिकल्स को खत्म करने में मदद करता है और हल्की सूजन को कम कर सकता है। यही वजह है कि यह
*जोड़ों के दर्द
*पाचन संबंधी समस्याओं
*गैस और ब्लोटिंग में सहायक माना जाता है।
हल्दी का असर तुरंत नहीं दिखता, बल्कि नियमित सेवन से इसके फायदे नजर आते हैं।हल्दी ऐसे करें सेवन,
तभी मिलेगा पूरा फायदा
करक्यूमिन शरीर में अकेले ठीक से अवशोषित नहीं होता।
इसके लिए जरूरी है:
*फैट (दूध, नारियल तेल या घी)
*काली मिर्च, जिसमें मौजूद पाइपरिन करक्यूमिन के अवशोषण को कई गुना बढ़ा देता है
इसी वजह से गोल्डन मिल्क को हल्दी का सबसे बेहतर रूप माना जाता है।
गोल्डन मिल्क: सिर्फ ट्रेंड नहीं, सेहत का साथी
गोल्डन मिल्क में आमतौर पर शामिल होते हैं:
*दूध या प्लांट-बेस्ड मिल्क
*हल्दी
*अदरक
*काली मिर्च
*दालचीनी या शहद (स्वाद के लिए)
यह न सिर्फ शरीर को गर्माहट देता है, बल्कि इम्युनिटी और ओवरऑल हेल्थ के लिए भी फायदेमंद है। सही तरीके से बनाया जाए तो यह सिर्फ एक फैशन ट्रेंड नहीं, बल्कि एक प्राचीन और प्रभावी हेल्थ ड्रिंक है।

