नई दिल्ली: कोलकाता में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने चुनाव प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी बनाने के लिए कई नए फैसलों की घोषणा की है। चुनाव आयोग के अनुसार, मतगणना और EVM जांच से जुड़े नियमों में बदलाव किए गए हैं, ताकि चुनावी प्रक्रिया पर भरोसा और मजबूत हो सके।
पहले होगी पोस्टल बैलेट की गिनती
चुनाव आयोग के नए निर्देशों के अनुसार अब पोस्टल बैलेट की गिनती EVM की गिनती शुरू होने से पहले पूरी करनी होगी। यानी EVM के पहले दो राउंड की गिनती शुरू होने से पहले ही डाक मतपत्रों की गणना समाप्त करना अनिवार्य होगा।इस फैसले का उद्देश्य मतगणना प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बनाना है।
मतदान के बाद एजेंटों को दिया जाता है Form 17C
मतदान समाप्त होने के बाद प्रेसाइडिंग ऑफिसर (पीठासीन अधिकारी) मतदान केंद्र पर मौजूद एजेंटों को Form 17C उपलब्ध कराते हैं।
इस फॉर्म में मतदान से जुड़ी अहम जानकारी दर्ज होती है, जिससे बाद में मतगणना के दौरान मिलान करना आसान होता है।
EVM और VVPAT के मिलान की प्रक्रिया
मतगणना के दौरान EVM में दर्ज वोटों का मिलान अन्य रिकॉर्ड से किया जाता है।
* यदि दोनों के आंकड़े सही तरीके से मेल खाते हैं, तो प्रक्रिया सामान्य रूप से पूरी मानी जाती है।
* लेकिन अगर किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या अंतर सामने आता है, तो संबंधित EVM की पूरी VVPAT पर्चियों की गिनती की जाएगी।
यह गिनती काउंटिंग एजेंटों की मौजूदगी में कराई जाएगी, ताकि प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी रहे।
हारने वाले उम्मीदवारों को मिलेगा EVM जांच का अधिकार
चुनाव आयोग ने एक और महत्वपूर्ण फैसला लेते हुए कहा है कि हारने वाला उम्मीदवार मतगणना के 7 दिनों के भीतर EVM की जांच की मांग कर सकता है।हालांकि इसके लिए उम्मीदवार को निर्धारित शुल्क जमा करना होगा। आयोग का कहना है कि यह व्यवस्था इतने बड़े चुनावी सिस्टम को प्रभावी ढंग से प्रबंधित करने और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए की गई है।
पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में कदम
चुनाव आयोग का मानना है कि इन नए नियमों से चुनावी प्रक्रिया में विश्वसनीयता और पारदर्शिता और मजबूत होगी।
भारत जैसे विशाल लोकतंत्र में चुनावों का निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से होना बेहद जरूरी है, इसलिए आयोग समय-समय पर प्रक्रियाओं में सुधार करता रहता है।

