मुंबई, भारत की महान गायिका आशा भोसले को अंतिम विदाई देते हुए उनके परिवार ने सोमवार को वाराणसी में गंगा तट पर उनकी अस्थियों का विसर्जन किया। इस दौरान उनके बेटे आनंद भोसले और पोती ज़नाई भोसले मौजूद रहे। धार्मिक रीति-रिवाजों और मंत्रोच्चार के साथ यह विधि पूरी की गई।
वाराणसी में गंगा किनारे हुए धार्मिक अनुष्ठान
पवित्र नगरी वाराणसी में गंगा के घाटों पर आशा भोसले की अस्थियों का विसर्जन किया गया। परिवार ने उनकी इच्छानुसार सभी पारंपरिक विधियों का पालन करते हुए पूजा-अर्चना की। इस दौरान भावुक माहौल देखने को मिला और ज़नाई भोसले अपने आंसू नहीं रोक पाईं।
12 अप्रैल को हुआ था निधन
92 वर्षीय आशा भोसले का 12 अप्रैल को Breach Candy Hospital में निधन हो गया था। उन्हें एक दिन पहले सीने में संक्रमण और थकान के कारण अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
उनका अंतिम संस्कार 13 अप्रैल को मुंबई के Shivaji Park Crematorium में पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया गया।
ज़नाई भोसले का भावुक संदेश
निधन के बाद ज़नाई भोसले ने सोशल मीडिया पर एक भावुक पोस्ट साझा करते हुए अपनी दादी को याद किया। उन्होंने लिखा कि आशा भोसले सिर्फ उनकी दादी ही नहीं, बल्कि उनकी सबसे करीबी दोस्त और जीवन का अहम हिस्सा थीं।
उन्होंने अपने संदेश में कहा कि वह हर सुबह उनकी कमी महसूस करती हैं और उनके साथ बिताए छोटे-छोटे पलों को याद करती हैं। ज़नाई ने लोगों से अपील की कि वे आशा भोसले को उनके जीवन और हंसी के लिए याद रखें।
भारतीय संगीत जगत की अमर आवाज
आशा भोसले भारतीय संगीत इतिहास की सबसे प्रतिष्ठित गायिकाओं में से एक थीं। उन्होंने कई भाषाओं में हजारों गाने गाए और दशकों तक अपने संगीत से लोगों के दिलों पर राज किया।
उनके निधन से संगीत जगत में एक युग का अंत हो गया है, लेकिन उनकी आवाज और विरासत हमेशा जीवित रहेगी।

