मुंबई: आगामी शैक्षणिक सत्र से पहले महाराष्ट्र सरकार ने विद्यार्थियों और अभिभावकों को बड़ी राहत देने की तैयारी कर ली है। राज्य सरकार अब एक व्यापक जागरूकता अभियान शुरू करेगी, जिसका उद्देश्य बाजार में बिक रही नकली पाठ्यपुस्तकों पर रोक लगाना और ‘बालभारती’ की असली किताबों की पहचान आसान बनाना है।
नकली किताबों पर सख्ती, 20 हजार से अधिक प्रतियां जब्त
विधानसभा में जानकारी देते हुए स्कूल शिक्षा मंत्री दादाजी भूसे ने बताया कि दिसंबर 2025 में नागपुर जिले के हिंगना एमआईडीसी क्षेत्र में एक निजी प्रिंटिंग प्रेस पर छापेमारी के दौरान कक्षा 9वीं से 12वीं तक की 20,000 से अधिक संदिग्ध पाठ्यपुस्तकें जब्त की गईं।
जांच में सामने आया कि ये किताबें महाराष्ट्र राज्य पाठ्यपुस्तक उत्पादन और पाठ्यक्रम अनुसंधान ब्यूरो (बालभारती) के नाम से अवैध रूप से छापी जा रही थीं। अधिकारियों के निरीक्षण के बाद संबंधित प्रिंटिंग प्रेस के मालिक के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई और उसे गिरफ्तार कर लिया गया।
क्यूआर कोड से होगी असली किताब की पहचान
मंत्री ने बताया कि नई रणनीति के तहत आगामी शैक्षणिक वर्ष से आधिकारिक बालभारती पाठ्यपुस्तकों के निर्धारित पृष्ठों पर विशेष क्यूआर कोड प्रिंट किए जाएंगे। इन क्यूआर कोड को स्कैन कर विद्यार्थी और अभिभावक किताब की प्रमाणिकता की पुष्टि कर सकेंगे।
सरकार का मानना है कि डिजिटल सत्यापन प्रणाली से फर्जी प्रकाशनों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकेगा।
राज्यभर में निगरानी के निर्देश
सरकार ने सभी क्षेत्रीय अधिकारियों को निजी प्रिंटिंग प्रेसों पर कड़ी नजर रखने के निर्देश दिए हैं। जहां भी अवैध छपाई की आशंका होगी, वहां तत्काल जांच और कार्रवाई की जाएगी।
मई-जून में चलेगा मीडिया अभियान
विद्यार्थियों, अभिभावकों और पुस्तक विक्रेताओं को जागरूक करने के लिए मई-जून में प्रिंट, डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के माध्यम से विशेष अभियान चलाया जाएगा। इसमें असली और नकली किताबों के बीच अंतर समझाने पर जोर रहेगा।
क्यों जरूरी है यह कदम?
* नकली किताबों से विद्यार्थियों को गलत या अधूरी जानकारी मिलने का खतरा
* सरकारी राजस्व को नुकसान
* गुणवत्ता और पाठ्यक्रम मानकों से समझौता
राज्य सरकार का यह कदम शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करने की दिशा में अहम माना जा रहा है। आगामी सत्र में क्यूआर कोड आधारित सत्यापन व्यवस्था लागू होने के बाद बालभारती की असली किताबों की पहचान पहले से कहीं अधिक आसान हो जाएगी।

