नई दिल्ली, ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के नौसेना कमांडर अलीरेज़ा तंगसीरी के मारे जाने की खबर सामने आई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्हें बंदर अब्बास के तटीय इलाके में अमेरिका और इज़राइल के संयुक्त हमले में निशाना बनाया गया। हालांकि, इस घटना को लेकर अब तक ईरान या इज़राइली सेना की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर था तंगसीरी का नियंत्रण
अलीरेज़ा तंगसीरी साल 2018 से IRGC नौसेना के प्रमुख थे और उन्हें होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर ईरान की रणनीति का मुख्य चेहरा माना जाता था। यह जलमार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, जहां से दुनिया का लगभग 20% तेल और गैस गुजरता है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, हाल के हफ्तों में ईरान ने इस जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर कड़ा नियंत्रण स्थापित कर दिया था। खासतौर पर अमेरिका और इज़राइल से जुड़े जहाजों को रोकने की कोशिश की जा रही थी।
शिपिंग ट्रैफिक में भारी गिरावट
ईरान की सख्ती के कारण होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों की संख्या में भारी गिरावट दर्ज की गई है। जहां सामान्य दिनों में रोजाना करीब 120 जहाज इस रास्ते से गुजरते थे, वहीं मार्च के पहले 25 दिनों में केवल 155 जहाजों की आवाजाही दर्ज की गई। यह लगभग 95% की कमी दर्शाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस स्थिति का असर वैश्विक तेल बाजार और ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ सकता है।
'टोल सिस्टम' लागू करने की तैयारी
ईरान से जुड़े कुछ मीडिया संस्थानों का दावा है कि तेहरान अब इस जलमार्ग से गुजरने वाले जहाजों से शुल्क वसूलने की योजना पर काम कर रहा है। रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि कुछ जहाजों से चीनी मुद्रा युआन में भुगतान लिया जा रहा है।
युद्ध के बीच लगातार बड़े हमले
यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब क्षेत्र में चल रहा संघर्ष चौथे सप्ताह में पहुंच चुका है। इससे पहले भी ईरान के कई वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों और शीर्ष नेताओं के मारे जाने की खबरें आ चुकी हैं।
हालांकि, इन हमलों के बावजूद ईरान की सैन्य और रणनीतिक क्षमता अभी भी सक्रिय बनी हुई है।

