वजन घटाने के लिए इन दिनों इंटरमिटेंट फास्टिंग तेजी से लोकप्रिय हो रही है। लोग इसे मेटाबॉलिज्म सुधारने और तेजी से वजन कम करने का आसान तरीका मानते हैं। लेकिन हाल ही में सामने आए एक बड़े अंतरराष्ट्रीय विश्लेषण में यह पाया गया है कि इंटरमिटेंट फास्टिंग पारंपरिक डाइट प्लान से ज्यादा प्रभावी नहीं है।
यह निष्कर्ष स्वास्थ्य अनुसंधान संस्था Cochrane Collaboration द्वारा किए गए व्यापक अध्ययन से निकला है।
22 अध्ययनों का विश्लेषण, 1,995 प्रतिभागी शामिल
2016 से 2024 के बीच उत्तर अमेरिका, यूरोप, चीन, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अमेरिका में किए गए 22 अध्ययनों की समीक्षा की गई। इन अध्ययनों में कुल 1,995 अधिक वजन या मोटापे से ग्रस्त वयस्कों को शामिल किया गया।
शोध में प्रतिभागियों को तीन समूहों में बांटा गया:
* पारंपरिक डाइट सलाह (कैलोरी कम करना, फल-सब्जियां और साबुत अनाज आधारित भोजन)
* इंटरमिटेंट फास्टिंग अपनाने वाले
कोई हस्तक्षेप नहीं (कंट्रोल ग्रुप)
* अध्ययन की अवधि 6 से 12 महीने तक रही।
इंटरमिटेंट फास्टिंग बनाम पारंपरिक डाइट: परिणाम क्या रहे?
21 अध्ययनों (1,713 प्रतिभागियों) के विश्लेषण में पाया गया कि:
* इंटरमिटेंट फास्टिंग और कैलोरी-सीमित डाइट दोनों में वजन घटाने का स्तर लगभग समान रहा।
* कुछ प्रतिभागियों में 10% तक वजन घटा, जबकि कुछ में 1% तक बढ़ोतरी भी देखी गई।
* छह अध्ययनों (448 प्रतिभागियों) में इंटरमिटेंट फास्टिंग की तुलना ‘कोई हस्तक्षेप नहीं’ समूह से की गई।
* फास्टिंग ग्रुप में औसतन 5% वजन कम हुआ
* कंट्रोल ग्रुप में लगभग 2% वजन घटा
हालांकि 3% का यह अंतर चिकित्सकीय रूप से महत्वपूर्ण नहीं माना जाता।
क्या इंटरमिटेंट फास्टिंग के अन्य फायदे हैं?
हालांकि वजन घटाने में इसे पारंपरिक डाइट से बेहतर नहीं पाया गया, लेकिन कुछ अध्ययनों में निम्न संभावित लाभ देखे गए:
* रक्तचाप में कमी
* मेटाबॉलिक सिंड्रोम के जोखिम में गिरावट
* चयापचय (Metabolism) में सुधार
लेकिन इन निष्कर्षों के लिए अधिक दीर्घकालिक और उच्च गुणवत्ता वाले शोध की जरूरत बताई गई है।
इंटरमिटेंट फास्टिंग क्या है?
* इंटरमिटेंट फास्टिंग एक ऐसी आहार पद्धति है जिसमें “क्या खाना है” की बजाय “कब खाना है” पर जोर दिया जाता है। * इसमें व्यक्ति निश्चित समय तक उपवास रखता है और तय समय सीमा में भोजन करता है।
* लोकप्रिय तरीकों में 16:8 पैटर्न, 5:2 डाइट और अल्टरनेट-डे फास्टिंग शामिल हैं।
विशेषज्ञों की सलाह
शोधकर्ताओं का कहना है कि उपलब्ध अध्ययनों की संख्या सीमित है और अधिकांश अध्ययन 12 महीने तक ही किए गए हैं। इसलिए दीर्घकालिक प्रभावों, खासकर वजन को लंबे समय तक बनाए रखने पर और शोध जरूरी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि
* इंटरमिटेंट फास्टिंग कुछ लोगों के लिए व्यवहारिक विकल्प हो सकता है।
* इसे पारंपरिक डाइट से बेहतर मानने के पर्याप्त प्रमाण अभी उपलब्ध नहीं हैं।
* किसी भी डाइट प्लान की सफलता व्यक्ति की जीवनशैली और पसंद पर निर्भर करती है।
* नई डाइट शुरू करने से पहले स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है, खासकर यदि कोई पुरानी बीमारी हो।
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