केप कैनवेरल (फ्लोरिडा), अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए 53 वर्षों बाद फिर से मानवों को चंद्रमा की दिशा में भेजने की तैयारी पूरी कर ली है। ‘आर्टेमिस-2’ मिशन के तहत चार अंतरिक्ष यात्रियों को लेकर स्पेस लॉन्च सिस्टम (SLS) रॉकेट जल्द ही उड़ान भरने वाला है।
यह मिशन पूरी तरह से परीक्षण आधारित मानव उड़ान होगा, जिसमें अंतरिक्ष यात्री पहले पृथ्वी की कक्षा में समय बिताएंगे और फिर ‘ओरियन’ अंतरिक्ष यान के जरिए चंद्रमा की परिक्रमा करते हुए वापस लौटेंगे। इस यात्रा की कुल अवधि लगभग 10 दिन तय की गई है और अंत में कैप्सूल का समुद्र में सुरक्षित अवतरण होगा।
नासा के अनुसार, तकनीकी बाधाओं को दूर करने के बाद अब सभी सिस्टम सुचारू रूप से काम कर रहे हैं। पहले निर्धारित लॉन्च को ईंधन रिसाव और अन्य तकनीकी समस्याओं के कारण टालना पड़ा था, लेकिन हालिया मरम्मत और परीक्षणों के बाद मिशन फिर से पटरी पर आ गया है।
प्रक्षेपण से पहले रॉकेट को दोबारा लॉन्च पैड पर स्थापित किया गया है और अंतरिक्ष यात्री दल भी अपने अंतिम चरण की तैयारियों में जुटा हुआ है। इस मिशन में शामिल टीम अमेरिका और कनाडा के सदस्यों से मिलकर बनी है।
यह अभियान Apollo Program के बाद पहला ऐसा प्रयास है, जिसमें इंसानों को चंद्रमा के पास भेजा जाएगा। खास बात यह है कि इस बार दल में विविधता देखने को मिलेगी—एक महिला, एक अश्वेत अंतरिक्ष यात्री और एक अंतरराष्ट्रीय सदस्य भी शामिल हैं।
मिशन के पायलट विक्टर ग्लोवर का मानना है कि यह उड़ान दुनिया भर के युवाओं के लिए प्रेरणा बनेगी। उन्होंने कहा कि इस पहल से अलग-अलग पृष्ठभूमि के बच्चों को अंतरिक्ष क्षेत्र में आगे बढ़ने का उत्साह मिलेगा।
नासा ने लॉन्च के लिए अप्रैल की शुरुआत में कुछ दिनों की समय-सीमा तय की है। यदि मौसम या तकनीकी कारणों से इस दौरान प्रक्षेपण नहीं हो पाता है, तो अगला मौका महीने के अंत में मिलेगा।
यह मिशन भविष्य में चंद्रमा पर मानव की वापसी और आगे मंगल जैसे गंतव्यों की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

