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67 साल का इंतजार खत्म, जम्मू-कश्मीर ने जीती रणजी ट्रॉफी

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Puja Nitnaware
Published in General
67 साल का इंतजार खत्म, जम्मू-कश्मीर ने जीती रणजी ट्रॉफी

भारतीय घरेलू क्रिकेट के 92 साल पुराने इतिहास में नया अध्याय जुड़ गया, जब जम्मू-कश्मीर ने पहली बार रणजी का खिताब अपने नाम किया।

हुबली: भारतीय घरेलू क्रिकेट के 92 साल पुराने इतिहास में नया अध्याय जुड़ गया, जब जम्मू-कश्मीर ने पहली बार रणजी का खिताब अपने नाम किया। केएससीए स्टेडियम, हुबली में खेले गए फाइनल में आठ बार की चैंपियन कर्नाटक के खिलाफ मुकाबला ड्रॉ रहा, लेकिन पहली पारी में 291 रन की विशाल बढ़त के आधार पर जम्मू-कश्मीर ने 67 साल का इंतजार खत्म करते हुए ऐतिहासिक जीत दर्ज की।

पहली पारी में मजबूत नींव, जीत की राह आसान

टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करते हुए जम्मू-कश्मीर ने पहली पारी में 584 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया। जवाब में कर्नाटक की टीम 293 रन पर सिमट गई। इस तरह जम्मू-कश्मीर को 291 रन की बढ़त मिली, जो मैच का निर्णायक मोड़ साबित हुई।

फॉलोऑन देने के बजाय जम्मू-कश्मीर ने दूसरी पारी खेलने का फैसला किया और अपनी पकड़ और मजबूत कर ली।

दूसरी पारी में इकबाल-लोत्रा का कमाल

पांचवें दिन जब जम्मू-कश्मीर ने दूसरी पारी में 4 विकेट पर 342 रन बना लिए, तब दोनों कप्तानों की सहमति से मैच ड्रॉ घोषित किया गया। उस समय कुल बढ़त 633 रन तक पहुंच चुकी थी।

* कामरान इकबाल – 160* रन

* साहिल लोत्रा – 101* रन (प्रथम श्रेणी करियर का पहला शतक)

दोनों बल्लेबाजों ने अंतिम दिन कर्नाटक को कोई सफलता नहीं दी और नाबाद शतक लगाकर टीम की जीत सुनिश्चित की।

टीम प्रयास ने दिलाया ऐतिहासिक खिताब

जम्मू-कश्मीर का यह खिताब किसी एक खिलाड़ी का नहीं, बल्कि सामूहिक प्रदर्शन का परिणाम रहा।

  • * शुभम पुंडीर ने फाइनल में महत्वपूर्ण शतक जड़ा।
  • * कप्तान पारस डोगरा रणजी ट्रॉफी में 10,000 रन पूरे करने वाले दूसरे बल्लेबाज बने।
  • * यावर हसन, अब्दुल समद और कन्हैया वधवान ने अहम अर्धशतक लगाए।
  • * तेज गेंदबाज आकिब नबी पूरे सत्र में शानदार रहे और सात बार पारी में पांच या अधिक विकेट झटके।

सेमीफाइनल से फाइनल तक दमदार सफर

जम्मू-कश्मीर ने इस सत्र की शुरुआत श्रीनगर में मुंबई से हार के साथ की थी, लेकिन इसके बाद टीम ने लगातार सुधार किया। कल्याणी में खेले गए सेमीफाइनल में उसने बंगाल को हराकर पहली बार फाइनल में जगह बनाई।

फाइनल में भी टीम पर कहीं से दबाव नहीं दिखा, जबकि कर्नाटक के पास कई अनुभवी और स्टार खिलाड़ी थे।

67 साल बाद सपना साकार

रणजी ट्रॉफी में जम्मू-कश्मीर ने 67 साल पहले पहली बार हिस्सा लिया था। लंबे समय तक उसे कमजोर टीम माना जाता रहा, लेकिन इस जीत ने साबित कर दिया कि दृढ़ संकल्प और टीम भावना से इतिहास रचा जा सकता है।

मैच के अंतिम दिन जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला भी टीम का उत्साह बढ़ाने के लिए स्टेडियम में मौजूद थे।

Tags:#Jammu and Kashmir#Ranji Trophy#Wins#Sport news

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