नई दिल्ली: देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद के विशेष सत्र की शुरुआत को महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में “ऐतिहासिक कदम” बताया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि महिलाओं का सम्मान ही देश की गरिमा का प्रतीक है और इसी भावना के साथ सरकार आगे बढ़ रही है।
प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा कि आज से शुरू हो रहा संसद का विशेष सत्र देश के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित होगा। उन्होंने संस्कृत के एक श्लोक का उल्लेख करते हुए महिलाओं के सम्मान को राष्ट्र की प्रगति से जोड़ा।
लोकसभा में आज पेश होगा बिल
सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी 16 अप्रैल को लोकसभा में महिला आरक्षण संविधान संशोधन विधेयक पर विस्तृत चर्चा करेंगे और इसके कार्यान्वयन का रोडमैप पेश कर सकते हैं।
केंद्र सरकार ने 16 से 18 अप्रैल तक तीन दिवसीय विशेष सत्र बुलाया है, जिसमें इस महत्वपूर्ण विधेयक को पेश किया जाएगा। प्रस्तावित संशोधन के तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का लक्ष्य रखा गया है।
इस बार सरकार 2029 से पहले ही इस आरक्षण को लागू करने की दिशा में कदम बढ़ा रही है, जबकि पहले इसे 2027 की जनगणना और परिसीमन प्रक्रिया से जोड़ा गया था।
क्या है नया प्रस्ताव?
सरकार द्वारा लाया जा रहा संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 महिला आरक्षण के साथ-साथ परिसीमन (Delimitation) से जुड़े प्रावधान भी शामिल करता है।
इस विधेयक का उद्देश्य:
• लोकसभा और विधानसभाओं में 33% महिला आरक्षण लागू करना
• परिसीमन प्रक्रिया में आवश्यक बदलाव करना
• समयसीमा को पहले लाना ताकि जल्द लागू हो सके
https://x.com/i/status/2044608643220582438
केंद्र बनाम विपक्ष: टकराव के आसार
विधेयक को लेकर सरकार और विपक्ष आमने-सामने हैं। विपक्षी दलों ने खासतौर पर परिसीमन प्रावधानों पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि इससे दक्षिणी राज्यों की राजनीतिक हिस्सेदारी प्रभावित हो सकती है, क्योंकि उन्होंने जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन किया है।
इस मुद्दे पर रणनीति बनाने के लिए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर विपक्षी नेताओं की बैठक हुई। बैठक में Rahul Gandhi, Tejashwi Yadav, Akhilesh Yadav समेत कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए।
क्यों अहम है महिला आरक्षण बिल?
महिला आरक्षण बिल लंबे समय से लंबित एक बड़ा राजनीतिक और सामाजिक सुधार माना जाता है। इसके लागू होने से:
• राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी
• नीति-निर्माण में संतुलित प्रतिनिधित्व मिलेगा
• जेंडर इक्विटी को मजबूती मिलेगी



