नई दिल्ली, सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) मामले में महत्वपूर्ण आदेश जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि जिन मतदाताओं की अपील अपीलीय ट्रिब्यूनल द्वारा मंजूर की जाएगी, उन्हें वोट डालने का अधिकार दिया जाएगा। कोर्ट ने यह निर्देश संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपने विशेष अधिकारों का उपयोग करते हुए दिया।
कोर्ट ने चुनाव आयोग (ECI) को निर्देश दिया है कि वह अपीलीय ट्रिब्यूनल के फैसलों को लागू करे और पात्र मतदाताओं को मतदान का अवसर सुनिश्चित करे।
23 अप्रैल को वोट डाल सकेंगे पात्र मतदाता
सुप्रीम कोर्ट के अनुसार, जिन व्यक्तियों की अपील ट्रिब्यूनल द्वारा मंजूर कर ली जाती है, वे 23 अप्रैल को होने वाले मतदान में हिस्सा ले सकेंगे। इसके अलावा, जिन अपीलों का निपटारा 21 अप्रैल या 27 अप्रैल तक हो जाएगा, उन व्यक्तियों को भी वोट डालने की अनुमति दी जाएगी।
चुनाव आयोग को जारी किए निर्देश
कोर्ट ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया है कि ऐसे मामलों में एक सप्लीमेंट्री संशोधित मतदाता सूची प्रकाशित की जाए, ताकि सभी पात्र मतदाता अपने मताधिकार का उपयोग कर सकें।
लंबित अपील पर नहीं मिलेगा मतदान अधिकार
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि केवल अपील का लंबित होना किसी व्यक्ति को वोट देने का अधिकार नहीं देता। जब तक अपील पर अंतिम निर्णय नहीं हो जाता, तब तक संबंधित व्यक्ति मतदान नहीं कर सकेगा।
चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता पर जोर
यह फैसला पश्चिम बंगाल में चल रहे SIR विवाद के बीच आया है और इससे चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित होने की उम्मीद जताई जा रही है। कोर्ट के इस आदेश से उन मतदाताओं को राहत मिलेगी, जिनके नाम मतदाता सूची से जुड़े विवादों में फंसे हुए हैं।

