नागपुर: महाराष्ट्र राज्य अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष प्यारे खान ने ‘वंदे मातरम’ को लेकर चल रहे विवाद पर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम् कोई नई बात नहीं है, लेकिन आज जिस तरह से इस मुद्दे को उठाया जा रहा है, वह मुसलमानों को निशाना बनाने की साजिश का हिस्सा प्रतीत होता है।
प्यारे खान ने कहा, “क्या इन लोगों को 2014 से पहले राष्ट्रीय गीत के बारे में जानकारी नहीं थी? जिस तरह आज इसे मुद्दा बनाया जा रहा है, वह मुसलमानों को खत्म करने की साजिश जैसा लगता है। हालांकि, देश के मुसलमान शिक्षित हैं और उन्हें गुमराह नहीं किया जा सकता।”
“देश के कानून का पालन करना इस्लाम की शिक्षा”
अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष ने कहा कि इस्लाम का मूल सिद्धांत है कि जिस देश में रहो, वहां के कानून का पालन करो। उन्होंने स्पष्ट किया कि मुसलमानों पर कोई जबरदस्ती नहीं की जा रही है।
उन्होंने कहा, “पहले हर उर्दू स्कूल में वंदे मातरम् गाया जाता था। स्कूलों के कार्यक्रमों में यह नियमित रूप से शामिल होता था। उस समय किसी ने आपत्ति नहीं जताई। मुस्लिम शिक्षक स्वयं वंदे मातरम् गाते थे और बच्चों से भी गवाते थे।”
“मुसलमान सही दिशा में आगे बढ़ रहे”
प्यारे खान ने कहा कि समाज में विभाजन पैदा करने की कोशिशें बंद होनी चाहिए। उन्होंने कहा, “मुसलमानों को अलग-थलग करने की कोशिश न करें। देश का मुस्लिम समाज अब सही दिशा में आगे बढ़ रहा है।”
गौरतलब है कि हाल के दिनों में कुछ स्थानों पर स्कूलों और सार्वजनिक कार्यक्रमों में वंदे मातरम् गाने को लेकर बहस तेज हुई है। नागपुर में दिया गया यह बयान राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है।



