नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में घोषित युद्धविराम पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। समझौते की घोषणा के महज एक दिन बाद ही हालात बिगड़ते नजर आ रहे हैं। बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने एक बार फिर रणनीतिक रूप से बेहद अहम होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Hormuz Strait) को बंद करने का फैसला लिया है, जिस अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ गई है।
यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब 11 अप्रैल को पाकिस्तान में अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधियों के बीच महत्वपूर्ण वार्ता प्रस्तावित है, जहां दोनों देशों के बीच सीजफायर की शर्तों पर अंतिम चर्चा होनी है।
लेबनान बना युद्धविराम टूटने की सबसे बड़ी वजह
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने यह कार्रवाई लेबनान पर इज़राइल के लगातार हो रहे हमलों के विरोध में की है। इज़राइली सेना ने गुरुवार को लेबनान में हिज़्बुल्लाह के ठिकानों पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए।
बताया जा रहा है कि:
* बेरूत सहित कई इलाकों में जबरदस्त बमबारी हुई
* दक्षिणी लेबनान और बेक्का वैली को निशाना बनाया गया
* कई रिहायशी और व्यापारिक इलाकों को नुकसान पहुंचा
इज़राइल का कहना है कि हिज़्बुल्लाह नागरिक क्षेत्रों से अपनी गतिविधियां संचालित करता है, हालांकि स्थानीय नागरिक और अधिकारी इस दावे को खारिज कर रहे हैं।
ईरान का दावा- लेबनान भी था समझौते का हिस्सा
ईरान का कहना है कि अमेरिका के साथ हुए युद्धविराम समझौते में लेबनान में सैन्य कार्रवाई रोकना भी शामिल था। ईरानी अधिकारियों के मुताबिक, उन्होंने युद्धविराम के लिए जो शर्तें रखी थीं उनमें लेबनान पर हमले रोकना प्रमुख बिंदु था।
हालांकि अमेरिका और इज़राइल दोनों ने साफ कर दिया है कि:
* लेबनान युद्धविराम समझौते का हिस्सा नहीं था
* समझौता केवल अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने के लिए था
यही विवाद अब पूरे समझौते को कमजोर कर रहा है।
होर्मुज़ जलडमरूमध्य बंद होने से बढ़ी वैश्विक चिंता
होर्मुज़ जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में गिना जाता है। इस रास्ते से रोज़ाना लाखों बैरल कच्चा तेल दुनिया के अलग-अलग देशों तक पहुंचता है।
ईरान द्वारा रास्ता बंद करने के बाद:
* कई तेल टैंकरों की आवाजाही रुक गई
* कई जहाजों को वापस लौटाया गया
* अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल कीमतें बढ़ने की आशंका तेज हो गई
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह स्थिति लंबी चली तो इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।
अब पाकिस्तान वार्ता पर टिकी दुनिया की नजर
अमेरिका और ईरान के बीच 11 अप्रैल को पाकिस्तान में होने वाली बैठक को बेहद अहम माना जा रहा है। माना जा रहा है कि इस बैठक में दोनों पक्ष युद्धविराम की शर्तों को लेकर अपनी स्थिति साफ करेंगे।
अगर लेबनान मुद्दे पर सहमति नहीं बनती है, तो यह संघर्षविराम टूट सकता है और मिडिल ईस्ट में हालात और ज्यादा गंभीर हो सकते हैं।



