नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण के मतदान से ठीक एक दिन पहले सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को कड़ी फटकार लगाई। अदालत ने कहा कि एक चल रही जांच में उनके हस्तक्षेप ने लोकतांत्रिक प्रक्रिया को खतरे में डाल दिया है।
जांच में हस्तक्षेप पर सख्त टिप्पणी
बुधवार को सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत की पीठ ने स्पष्ट किया कि यह मामला केंद्र बनाम राज्य का नहीं है, बल्कि एक संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति द्वारा जांच प्रक्रिया में हस्तक्षेप का है। कोर्ट ने कहा कि इस तरह का कदम लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा पैदा करता है।
पीठ ने टिप्पणी करते हुए कहा,“यह केंद्र और राज्य के बीच का विवाद नहीं है। यह एक ऐसा मामला है जिसमें एक मुख्यमंत्री जांच के बीच में हस्तक्षेप कर रही हैं और लोकतंत्र को जोखिम में डाल रही हैं।”
अदालत ने आगे कहा कि उसने कभी नहीं सोचा था कि देश में ऐसा दिन भी आएगा जब कोई मुख्यमंत्री जांच के दौरान दखल देगा। एक और कड़ी टिप्पणी में कोर्ट ने कहा कि मुख्यमंत्री ने “पूरे सिस्टम को खतरे में डाल दिया है।”
चुनावी माहौल में बढ़ा तनाव
पश्चिम बंगाल में 294 सीटों वाली विधानसभा के लिए मतदान दो चरणों में कराया जाएगा:
- पहला चरण: 23 अप्रैल
- दूसरा चरण: 29 अप्रैल
वहीं, मतगणना 4 मई को होगी। चुनाव से पहले आई इस न्यायिक टिप्पणी ने राज्य की राजनीति में हलचल और बढ़ा दी है।
लोकतांत्रिक संस्थाओं पर सवाल
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की न्यायिक टिप्पणी न केवल राज्य सरकार के कामकाज पर सवाल उठाती है, बल्कि यह भी संकेत देती है कि संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों को जांच एजेंसियों की स्वतंत्रता का सम्मान करना चाहिए।



