पटना: बिहार की राजनीति में एक बड़े बदलाव के तहत सम्राट चौधरी ने बुधवार को राज्य के 21वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। उनके शपथ ग्रहण के साथ ही नीतीश कुमार के लंबे कार्यकाल का औपचारिक अंत हो गया।
राजभवन में आयोजित समारोह में बिहार के राज्यपाल Syed Ata Hasnain ने उन्हें पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस मौके पर भाजपा के शीर्ष नेता और सहयोगी दलों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।
बिहार में सत्ता का बड़ा राजनीतिक बदलाव
सम्राट चौधरी का मुख्यमंत्री बनना बिहार की राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है। पहली बार भारतीय जनता पार्टी (BJP) राज्य में सीधे तौर पर सरकार का नेतृत्व कर रही है। यह बदलाव हाल के राजनीतिक समीकरणों और गठबंधन की पुनर्संरचना का परिणाम है।
नीतीश कुमार का इस्तीफा और नई भूमिका
पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मंगलवार को अपने पद से इस्तीफा देते हुए कैबिनेट को भंग कर दिया था। अब वे राज्यसभा सांसद के रूप में नई भूमिका निभा रहे हैं। उनके इस्तीफे के बाद सत्ता परिवर्तन की प्रक्रिया तेज हो गई थी।
डिप्टी सीएम से सीएम तक का सफर
सम्राट चौधरी, जिन्होंने 2017 में भाजपा जॉइन की थी, हाल ही में बिहार के उपमुख्यमंत्री और गृह मंत्री के रूप में कार्य कर चुके हैं। प्रशासनिक अनुभव और संगठनात्मक पकड़ के चलते उन्हें भाजपा विधायक दल का नेता चुना गया और इसके बाद मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी सौंपी गई।
जातीय समीकरण में अहम संदेश
बिहार की सामाजिक-राजनीतिक संरचना को देखते हुए सम्राट चौधरी का मुख्यमंत्री बनना जातीय दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। वे कोयरी समुदाय से आने वाले दूसरे मुख्यमंत्री हैं। इससे पहले Satish Prasad Singh ने 1968 में मात्र 5 दिनों के लिए यह पद संभाला था।
करपुरी ठाकुर की परंपरा में शामिल
सम्राट चौधरी उन चुनिंदा नेताओं में शामिल हो गए हैं जिन्होंने उपमुख्यमंत्री और मुख्यमंत्री दोनों पदों पर कार्य किया है। इससे पहले Karpoori Thakur भी इस उपलब्धि को हासिल कर चुके थे।



