नई दिल्ली:भारत की पहली महिला राष्ट्रपति प्रतिाभा पाटिल ने 11 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर नारी शक्ति वंदन अधिनियम (महिला आरक्षण कानून) का समर्थन किया है। उन्होंने इस कानून को महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने की दिशा में एक ऐतिहासिक और परिवर्तनकारी कदम बताया।
अपने पत्र में पाटिल ने लिखा कि यह संवैधानिक संशोधन भारत के लोकतांत्रिक ढांचे को मजबूत करेगा और विधायी संस्थाओं में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करेगा। उन्होंने इस पहल के लिए सरकार की सराहना करते हुए कहा कि यह महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ा कदम है।
महिला सशक्तिकरण पर जोर
प्रतिाभा पाटिल ने अपने कार्यकाल को याद करते हुए कहा कि उन्होंने देश की पहली महिला राष्ट्रपति के रूप में हमेशा महिलाओं को समान अवसर दिलाने की दिशा में काम किया। उन्होंने इस ऐतिहासिक पहल में योगदान देने वाले सभी पक्षों की भी सराहना की।
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पीएम मोदी का ‘नारी शक्ति’ संदेश
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी हाल ही में ‘नारी शक्ति’ को संबोधित करते हुए महिला आरक्षण कानून को जल्द लागू करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि विधायी संस्थाओं में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना समय की मांग है।
संसद सत्र से पहले पीएम मोदी ने लोकसभा और राज्यसभा के सभी दलों के नेताओं को पत्र लिखकर इस कानून के समर्थन की अपील की है।
संसद सत्र में होगा अहम चर्चा
आगामी संसद सत्र के दौरान नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर विशेष चर्चा होने की संभावना है। सरकार इस संवैधानिक संशोधन को आगे बढ़ाने की रणनीति बना रही है।
इस बीच, भारतीय जनता पार्टी ने अपने सांसदों के लिए 16 से 18 अप्रैल तक दोनों सदनों में उपस्थित रहने के लिए तीन-लाइन व्हिप जारी किया है।
क्या है महिला आरक्षण कानून?
सितंबर 2023 में पारित यह कानून संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए सीटों के आरक्षण का प्रावधान करता है। इसे भारत में महिलाओं के राजनीतिक सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।



