नई दिल्ली: संसद में प्रस्तावित महिला आरक्षण बिल को लेकर सियासी माहौल गरमा गया है। शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) के वरिष्ठ नेता संजय राउत ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए इस विधेयक को ‘नारी शक्ति बिल’ के बजाय ‘बीजेपी शक्ति बिल’ करार दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार महिला आरक्षण के नाम पर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रही है।
विपक्ष की बैठक में बनी रणनीति
राउत ने बताया कि विपक्षी दलों की एक अहम बैठक नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर आयोजित हुई, जिसमें राहुल गांधी भी शामिल हुए। वहीं, शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बैठक से जुड़े। बैठक में सभी दलों ने स्पष्ट किया कि वे महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं हैं, बल्कि सरकार की मंशा पर सवाल उठा रहे हैं।
‘महिला आरक्षण का समर्थन, लेकिन राजनीति नहीं’
संजय राउत ने कहा कि उनकी पार्टी पहले भी महिला आरक्षण बिल का समर्थन कर चुकी है। उन्होंने याद दिलाया कि 2023 में जब यह बिल पास हुआ था, तब भी विपक्ष ने इसका समर्थन किया था। लेकिन इस बार सरकार जिस तरह से इसे परिसीमन (Delimitation) से जोड़ रही है, वह संदेह पैदा करता है।
सीटें बढ़ाने की क्या जरूरत?
राउत ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर महिलाओं को 33% आरक्षण देना है, तो मौजूदा 543 लोकसभा सीटों पर ही लागू किया जा सकता है। उन्होंने कहा, “लगभग 800 सीटें करने की बात हो रही है और महाराष्ट्र में विधानसभा सीटें 400 तक बढ़ाने की चर्चा है। आखिर इसकी जरूरत क्या है?”
‘नाम बदलकर बीजेपी शक्ति बिल कर दें’
राउत ने कटाक्ष करते हुए कहा कि अगर सरकार अपनी राजनीतिक रणनीति के तहत यह सब कर रही है, तो इस बिल का नाम ‘नारी शक्ति’ की जगह ‘बीजेपी शक्ति बिल’ रख देना चाहिए।
ममता बनर्जी से की अपील
इस दौरान उन्होंने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से भी अपील की कि उनकी पार्टी के सांसद लोकसभा में सरकार के खिलाफ वोट करें। उन्होंने बताया कि उद्धव ठाकरे को ममता बनर्जी से बातचीत की जिम्मेदारी दी गई है और दोनों के बीच पहले से बेहतर तालमेल है।
संसद में हंगामे के आसार
आज संसद के विशेष सत्र में महिला आरक्षण से संबंधित संशोधन विधेयक पेश होने की संभावना है। हालांकि, विपक्ष इस मुद्दे पर आक्रामक रुख अपनाए हुए है। विपक्षी दलों का आरोप है कि सरकार इस बिल की आड़ में मनमाने तरीके से परिसीमन लागू करना चाहती है।



