नई दिल्ली: टेक्नोलॉजी सेक्टर की बड़ी कंपनी Oracle ने हाल के दिनों में बड़े स्तर पर कर्मचारियों की छंटनी की है। विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह संख्या वैश्विक स्तर पर 30,000 तक पहुंच सकती है, हालांकि कंपनी ने आधिकारिक आंकड़ा जारी नहीं किया है।
कंपनी की इस कार्रवाई ने आईटी इंडस्ट्री में हलचल मचा दी है, खासकर इसलिए क्योंकि यह कदम मजबूत वित्तीय प्रदर्शन के बावजूद उठाया गया है।
भारत समेत कई देशों में असर
Oracle की इस छंटनी का असर भारत, मेक्सिको और अन्य देशों में देखने को मिला है।
भारत में स्थिति ज्यादा गंभीर बताई जा रही है, जहां हजारों कर्मचारियों की नौकरियां प्रभावित हुई हैं।
AI रणनीति बना मुख्य कारण
विशेषज्ञों के अनुसार, Oracle का यह फैसला उसकी नई बिजनेस रणनीति से जुड़ा है। कंपनी अब तेजी से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर की ओर बढ़ रही है।
बताया जा रहा है कि Oracle ने OpenAI के साथ बड़े स्तर पर डेटा सेंटर विकसित करने की दिशा में काम शुरू किया है। इस प्रोजेक्ट के तहत भारी निवेश की जरूरत है, जिसके चलते कंपनी अपने खर्चों को संतुलित करने की कोशिश कर रही है।
कर्ज और बढ़ते खर्च ने बढ़ाया दबाव
Oracle पर भारी कर्ज होने की भी चर्चा है, जिससे कंपनी की वित्तीय स्थिति पर दबाव बना हुआ है।
इसी के चलते कंपनी लागत कम करने के लिए छंटनी जैसे कदम उठा रही है।
विश्लेषकों का मानना है कि इस फैसले से कंपनी को अरबों डॉलर की बचत हो सकती है, जिसे भविष्य की तकनीकों में निवेश किया जाएगा।
टेक्नोलॉजी बदलाव भी बना चुनौती
AI और चिप टेक्नोलॉजी तेजी से बदल रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, OpenAI जैसे क्लाइंट्स अब Nvidia के नए और ज्यादा एडवांस्ड चिप्स की ओर रुख कर सकते हैं।
ऐसे में Oracle के मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश पर जोखिम बना हुआ है।
शेयर बाजार में मिला मिला-जुला संकेत
छंटनी की खबर के बावजूद Oracle के शेयरों में अल्पकालिक तेजी देखी गई।
हालांकि, पिछले कुछ महीनों में कंपनी के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई है, जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ी है।
इसका असर कंपनी के संस्थापक Larry Ellison की कुल संपत्ति पर भी पड़ा है।
क्या आगे और बदलाव संभव?
विशेषज्ञ मानते हैं कि Oracle आने वाले समय में और बड़े बदलाव कर सकता है। कंपनी का फोकस अब पारंपरिक सेवाओं से हटकर AI और क्लाउड पर रहेगा।

