नागपुर में अल्पसंख्यक दर्जा प्रमाणपत्र को लेकर बड़ा खुलासा सामने आया है। Maharashtra State Minority Commission के अध्यक्ष प्यारे खान ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि राज्य में बड़ी संख्या में स्कूलों को संदिग्ध परिस्थितियों में अल्पसंख्यक दर्जा प्रमाणपत्र जारी किए गए।
उन्होंने दावा किया कि 75 स्कूलों को अल्पसंख्यक दर्जा प्रमाणपत्र एक ही दिन और अजित पवार के निधन के अगले दिन जारी किए गए। उनके अनुसार, कुछ लोगों ने उनके निधन का अनुचित लाभ उठाया।
95% स्कूल पाए गए फर्जी
प्यारे खान ने कहा कि जिन कुछ अल्पसंख्यक स्कूलों का उन्होंने दौरा किया, उनमें से लगभग 95% स्कूल फर्जी पाए गए और भ्रष्टाचार में लिप्त थे। उन्होंने इस मामले को गंभीर घोटाला बताते हुए कहा कि यह सिर्फ अनियमितता नहीं, बल्कि संगठित भ्रष्टाचार का मामला है।
SIT जांच में 6000-7000 लोगों की संलिप्तता
मामले की गंभीरता को देखते हुए उन्होंने Devendra Fadnavis से विशेष जांच दल (SIT) गठित करने का अनुरोध किया था। SIT की जांच में चौंकाने वाले खुलासे हुए।रिपोर्ट के अनुसार, इस मामले में 6000 से 7000 लोगों की संलिप्तता सामने आई है, जिनमें शिक्षा विभाग के अधिकारी भी शामिल हैं।
MCOCA के तहत होगी कार्रवाई
प्यारे खान ने कहा कि यह घोटाला अभी सामने आए तथ्यों से भी बड़ा हो सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पूरे मामले की विस्तृत जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने कहा कि इस मामले में महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (MCOCA) के तहत कार्रवाई की जाएगी, ताकि संगठित भ्रष्टाचार में शामिल लोगों पर सख्त शिकंजा कसा जा सके।
CID जांच की मांग
प्यारे खान ने बताया कि जब उन्होंने इस मुद्दे पर अजित पवार से बात की थी, तो पवार ने कहा था कि केवल योग्य और अच्छे स्कूलों को ही प्रमाणपत्र दिए जाएंगे।
अब उन्होंने इस पूरे प्रकरण की जांच अपराध अन्वेषण विभाग (CID) से कराने की मांग की है, ताकि सच्चाई सामने आ सके और दोषियों को सजा मिल सके।

