मुंबई: महाराष्ट्र में शिक्षा और सरकारी नौकरियों में सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े मुस्लिम वर्गों को मिलने वाला 5 प्रतिशत आरक्षण रद्द किए जाने के बाद राजनीतिक विवाद गहरा गया है। विपक्षी दलों ने इस निर्णय को अल्पसंख्यकों के हितों के खिलाफ बताते हुए राज्य की भाजपा नेतृत्व वाली सरकार पर तीखा हमला बोला है।
राज्य में सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन, जिसमें भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) और शिवसेना शामिल हैं, के इस फैसले को लेकर कांग्रेस और एनसीपी (शरद पवार गुट) ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है।
कांग्रेस का आरोप: विकास से वंचित होंगे अल्पसंख्यक
कांग्रेस नेता नसीम खान ने प्रेस से बातचीत में कहा कि सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े मुस्लिम समुदाय को आरक्षण से वंचित करना “बेहद गलत” कदम है। उनके अनुसार, इससे अल्पसंख्यक समुदाय मुख्यधारा के विकास से दूर हो सकता है।
उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2014 में तत्कालीन कांग्रेस-एनसीपी सरकार ने मुस्लिम आरक्षण लागू करने के लिए अध्यादेश जारी किया था। बाद में देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली सरकार ने इस प्रक्रिया को आगे नहीं बढ़ाया। उन्होंने यह भी कहा कि बंबई उच्च न्यायालय द्वारा शिक्षा में 5 प्रतिशत आरक्षण पर अंतरिम राहत मिलने के बावजूद इसका प्रभावी क्रियान्वयन नहीं किया गया।
छात्रवृत्ति और योजनाओं में कटौती का आरोप
कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती सरकार द्वारा शुरू की गई कई अल्पसंख्यक कल्याणकारी योजनाएं बंद कर दी गई हैं। छात्रवृत्तियों के बजट में भी कथित रूप से भारी कटौती की गई है। दावा किया गया कि जहां लगभग 90 करोड़ रुपये की आवश्यकता थी, वहां केवल 20 करोड़ रुपये का ही प्रावधान किया गया।इसके अलावा, कुछ शिक्षण संस्थानों को अल्पसंख्यक दर्जा प्रमाणपत्र जारी करने में अनियमितताओं के आरोप भी लगाए गए हैं। विपक्ष ने इस मामले में स्वतंत्र जांच एजेंसी से जांच कराने की मांग की है।
सरकार पर दोहरे रवैये का आरोप
कांग्रेस की मुंबई इकाई की अध्यक्ष वर्षा गायकवाड़ ने कहा कि मुस्लिम आरक्षण धर्म आधारित नहीं था, बल्कि सामाजिक और शैक्षणिक पिछड़ेपन को ध्यान में रखकर दिया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार एक ओर “सबका साथ, सबका विकास” की बात करती है और दूसरी ओर आरक्षण से संबंधित प्रक्रियाओं को समाप्त कर रही है।विपक्ष का कहना है कि यह कदम लोकतंत्र और समान अवसर की भावना के खिलाफ है।
एनसीपी (शरद पवार गुट) की प्रतिक्रिया
एनसीपी (शरद पवार गुट) के प्रवक्ता क्लाइड क्रास्टो ने कहा कि यह फैसला दर्शाता है कि भाजपा अपने दल और सहयोगी दलों के मुस्लिम नेताओं को भी महत्व नहीं देती। उन्होंने इसे राजनीतिक रूप से गलत संदेश देने वाला निर्णय बताया।
क्या है पूरा मामला?
हाल ही में जारी सरकारी आदेश (जीआर) के अनुसार, विशेष पिछड़ा वर्ग (ए) के अंतर्गत सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े मुस्लिम समूहों को शिक्षा और सरकारी/अर्ध-सरकारी नौकरियों में दिए जाने वाले 5 प्रतिशत आरक्षण से संबंधित सभी पूर्व निर्णय और अध्यादेश रद्द कर दिए गए हैं।
गौरतलब है कि पूर्व कांग्रेस-एनसीपी सरकार ने मराठा समुदाय को 16 प्रतिशत और मुसलमानों को 5 प्रतिशत आरक्षण देने का प्रावधान अध्यादेश के जरिए किया था।
मामला अब राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन गया है। विपक्ष सरकार से अपने फैसले पर पुनर्विचार की मांग कर रहा है, जबकि सरकार की ओर से अभी तक विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।महाराष्ट्र की राजनीति में यह मुद्दा आने वाले समय में और गरमा सकता है, खासकर जब यह शिक्षा, रोजगार और सामाजिक न्याय जैसे संवेदनशील विषयों से जुड़ा हुआ है।

