नई दिल्ली: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर दिए गए अपने विवादित “आतंकवादी” बयान पर सफाई दी है। उन्होंने कहा कि उनका बयान शाब्दिक रूप से नहीं था, बल्कि यह केंद्र सरकार की एजेंसियों के कथित दुरुपयोग पर टिप्पणी थी।
क्या कहा खड़गे ने?
मंगलवार को कर्नाटक के कलबुर्गी में पत्रकारों से बातचीत के दौरान खड़गे ने कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री को सीधे तौर पर आतंकवादी नहीं कहा। उनका इशारा उन कार्रवाइयों की ओर था, जिनमें केंद्रीय एजेंसियों के जरिए विपक्षी नेताओं को डराने और दबाव बनाने का आरोप लगाया जाता है।
खड़गे ने कहा:«“मैंने प्रधानमंत्री को आतंकवादी नहीं कहा। मेरा मतलब था कि वे लोगों को डराने के लिए माहौल बना रहे हैं और एजेंसियों का इस्तेमाल कर विपक्ष को निशाना बना रहे हैं।”»
उन्होंने आगे आरोप लगाया कि चुनावों के दौरान CBI, ED और आयकर विभाग जैसी एजेंसियों का इस्तेमाल राजनीतिक विरोधियों को कमजोर करने के लिए किया जा रहा है।
BJP का कड़ा विरोध, चुनाव आयोग पहुंचा मामला
भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने खड़गे के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी है और इस मामले को चुनाव आयोग तक पहुंचाया है। पार्टी ने इसे “अत्यंत आपत्तिजनक” बताते हुए कहा कि यह मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट का उल्लंघन है।
BJP की शिकायत में कहा गया है कि:
- प्रधानमंत्री को “आतंकवादी” कहना व्यक्तिगत हमला है
- यह मतदाताओं को प्रभावित करने की कोशिश है
- यह पहली नजर में मानहानि के दायरे में आता है
BJP नेताओं की प्रतिक्रिया
कई BJP नेताओं ने खड़गे की सफाई को खारिज कर दिया:
- पार्टी प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने इसे संविधान विरोधी और नफरत फैलाने वाला बताया
- केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कांग्रेस से माफी की मांग की
- अमित मालवीय और संबित पात्रा ने भी बयान को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया
गोयल ने कहा कि इस तरह के व्यक्तिगत हमले चुनावी नतीजों को प्रभावित नहीं कर पाएंगे।
कांग्रेस का पक्ष
खड़गे ने स्पष्ट किया कि उनकी आलोचना प्रधानमंत्री के व्यक्तिगत चरित्र पर नहीं, बल्कि “संस्थाओं के कथित दुरुपयोग” पर केंद्रित थी। उन्होंने कहा कि सरकार अपनी ताकत का इस्तेमाल विपक्ष को दबाने के लिए कर रही है।



