मुंबई: महाराष्ट्र की राजनीति में वारकरी संप्रदाय के धर्मग्रंथों को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार गुट) के वरिष्ठ नेता जयंत पाटिल ने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंददेवगिरि की कथित टिप्पणी पर कड़ा एतराज जताते हुए सार्वजनिक माफी की मांग की है।
क्या है पूरा मामला?
विधानसभा में मुद्दा उठाते हुए जयंत पाटिल ने कहा कि वारकरी परंपरा के प्रमुख ग्रंथों— ज्ञानेश्वरी, भागवत तथा संत नामदेव और संत तुकाराम के अभंगों— को मात्र ‘टीका’ या ‘संकलन’ बताना लाखों श्रद्धालुओं की भावनाओं को ठेस पहुंचाने जैसा है।
उन्होंने कहा कि ये ग्रंथ केवल धार्मिक पुस्तकें नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन और समानता के संदेश का आधार रहे हैं। महाराष्ट्र की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान में इनका विशेष स्थान है।
सरकार से हस्तक्षेप की मांग
पाटिल ने सरकार और सभी विधायकों से अपील की कि वे राज्य की संत परंपरा और आध्यात्मिक धरोहर का सम्मान करें। उनका कहना था कि इस प्रकार के बयान समाज में अनावश्यक विभाजन पैदा कर सकते हैं।
उन्होंने स्पष्ट रूप से मांग की कि संबंधित टिप्पणी को वापस लिया जाए और सार्वजनिक रूप से माफी मांगी जाए।
वारकरी समुदाय की प्रतिक्रिया
वारकरी संप्रदाय, जो भगवान विट्ठल की भक्ति पर आधारित एक प्रमुख भक्ति आंदोलन है, के अनुयायियों ने भी इस कथित टिप्पणी पर नाराजगी जताई है। समुदाय के कई प्रतिनिधियों ने इसे आस्था पर आघात बताया।
सरकार का पक्ष
राज्य सरकार की ओर से संकेत दिया गया है कि इस विषय पर आधिकारिक बयान जारी किया जाएगा।

