नई दिल्ली: पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में हालिया कटौती को लेकर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। पार्टी का आरोप है कि यह फैसला चार राज्यों और एक केंद्रशासित प्रदेश में हो रहे विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखकर लिया गया है, न कि आम जनता को राहत देने के उद्देश्य से।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर टिप्पणी करते हुए कहा कि जब वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें पहले कई बार गिरीं, तब भारत में उपभोक्ताओं को इसका फायदा नहीं मिला। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि लोगों को 30 अप्रैल तक इंतजार करना चाहिए, जिससे इस फैसले के पीछे की वास्तविक मंशा स्पष्ट हो जाएगी।
गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में 29 अप्रैल को दूसरे और अंतिम चरण का मतदान होना है, जिसे लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है।
सरकार ने हाल ही में पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क घटाकर 3 रुपये प्रति लीटर कर दिया है, जबकि डीजल पर इसे शून्य कर दिया गया है। इस फैसले का उद्देश्य हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड, भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड और इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन जैसी तेल विपणन कंपनियों को राहत देना बताया गया है, जो पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण बढ़ती कच्चे तेल की कीमतों से प्रभावित हुई हैं।
वहीं, कांग्रेस के मीडिया विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने भी इस कदम पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि अगर लोगों को लग रहा है कि पेट्रोल-डीजल सस्ता हुआ है, तो यह गलतफहमी है। उनके अनुसार, यह कटौती ‘विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क’ में की गई है, जो तेल कंपनियां सरकार को देती हैं, न कि सीधे उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए।
खेड़ा ने दावा किया कि इस फैसले से आम जनता को कोई वास्तविक लाभ नहीं मिला है और कीमतें अभी भी पहले जैसी ही हैं। उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि वह केवल सुर्खियां बटोरने की कोशिश कर रही है, जबकि जरूरत उपभोक्ताओं को वास्तविक राहत देने की है।

