नई दिल्ली: भारत सरकार ने अमेरिका और ईरान के बीच हुए हालिया युद्धविराम (Ceasefire) समझौते का स्वागत किया है। विदेश मंत्रालय (MEA) ने इसे मध्य पूर्व में तनाव कम करने की दिशा में एक सकारात्मक कदम बताया है और उम्मीद जताई है कि इससे क्षेत्र में स्थायी शांति और स्थिरता स्थापित होगी।
विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि भारत लगातार संवाद, कूटनीति और शांतिपूर्ण समाधान का समर्थन करता आया है और मौजूदा संघर्ष को जल्द समाप्त करने के लिए यही सबसे प्रभावी रास्ता है।
MEA ने अपने आधिकारिक बयान में कहा, “हम हुए युद्धविराम का स्वागत करते हैं और आशा करते हैं कि इससे पश्चिम एशिया में स्थायी शांति स्थापित होगी। जैसा कि हम पहले भी कहते आए हैं, तनाव कम करने, बातचीत और कूटनीति के जरिए ही इस संघर्ष का शीघ्र समाधान संभव है।”
Strait of Hormuz को लेकर भारत की चिंता
भारत ने इस दौरान Strait of Hormuz (होर्मुज जलडमरूमध्य) में सुरक्षित और निर्बाध समुद्री यातायात की आवश्यकता पर भी जोर दिया। यह मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
विदेश मंत्रालय ने कहा कि वर्तमान संघर्ष ने न केवल लोगों को भारी नुकसान पहुंचाया है बल्कि वैश्विक ऊर्जा सप्लाई और व्यापार नेटवर्क को भी प्रभावित किया है।
MEA ने कहा, “इस संघर्ष ने लोगों को भारी पीड़ा दी है और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति तथा व्यापारिक नेटवर्क को बाधित किया है। हमें उम्मीद है कि Strait of Hormuz के जरिए व्यापार और नौवहन की स्वतंत्र आवाजाही जल्द सामान्य होगी।”
भारत ने शांति और स्थिरता पर दिया जोर
भारत ने एक बार फिर स्पष्ट किया कि वह मध्य पूर्व क्षेत्र में शांति, स्थिरता और कूटनीतिक समाधान का समर्थक है। भारत का मानना है कि इस युद्धविराम से क्षेत्रीय तनाव कम होगा और अंतरराष्ट्रीय व्यापार व ऊर्जा बाजार को राहत मिलेगी।



