नई दिल्ली, केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल की बढ़ती वैश्विक कीमतों के बीच बड़ा कदम उठाते हुए एक्साइज ड्यूटी में भारी कटौती की है। वित्त मंत्रालय की 26 मार्च को जारी अधिसूचना के मुताबिक, पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क 13 रुपये प्रति लीटर से घटाकर 3 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है, जबकि डीजल पर यह शुल्क 10 रुपये से घटाकर पूरी तरह शून्य कर दिया गया है।
सरकार का यह फैसला तुरंत प्रभाव से लागू हो गया है। इसका उद्देश्य घरेलू तेल विपणन कंपनियों पर बढ़ते वित्तीय दबाव को कम करना है। इसमें प्रमुख कंपनियां जैसे हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड, भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड और इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन शामिल हैं।
क्यों लिया गया यह फैसला?
पश्चिम एशिया में जारी तनाव और युद्ध जैसी स्थिति के चलते कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में तेज उछाल आया है। 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर हमले के बाद से वैश्विक बाजार में तेल की कीमतें करीब 50% तक बढ़ चुकी हैं।
इसके बावजूद भारत में पेट्रोल और डीजल के खुदरा दाम स्थिर रखे गए हैं, जिससे तेल कंपनियों पर लागत का दबाव बढ़ गया था। सरकार की यह टैक्स कटौती उसी दबाव को कम करने के लिए की गई है।
आम लोगों पर क्या असर पड़ेगा?
हालांकि यह कटौती मुख्य रूप से तेल कंपनियों को राहत देने के लिए है, लेकिन भविष्य में इससे ईंधन की कीमतों में स्थिरता बनी रहने की संभावना है।



