मुंबई: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के शताब्दी वर्ष के तहत आयोजित एक कार्यक्रम में अभिनेता सलमान खान की उपस्थिति को लेकर सियासी बहस छिड़ गई है। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने इस मुद्दे पर सवाल उठाने वालों को जवाब देते हुए कहा कि सलमान खान को आमंत्रित करने में कोई आपत्तिजनक बात नहीं है।
मुंबई के नेहरू सेंटर में आयोजित इस कार्यक्रम में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत मुख्य वक्ता थे। कार्यक्रम में सलमान खान सहित कई फिल्मी हस्तियां मौजूद रहीं। जैसे ही सलमान खान को संघ प्रमुख के साथ बातचीत करते देखा गया, विपक्षी खेमे से तंज कसने शुरू हो गए।
एकनाथ शिंदे ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सलमान खान एक भारतीय नागरिक हैं और देश की संस्कृति व परंपराओं का सम्मान करते हैं। उन्होंने सवाल किया कि अगर कोई भारतीय, चाहे वह फिल्म अभिनेता ही क्यों न हो, राष्ट्र से जुड़े कार्यक्रम में शामिल होता है तो उसमें गलत क्या है।
शिंदे ने आरएसएस का बचाव करते हुए कहा कि यह संगठन देशभक्ति की भावना से ओत-प्रोत है और उसके कार्यकर्ताओं के रग-रग में राष्ट्रप्रेम बसा हुआ है।
वहीं, शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे गुट) के नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने इस मुद्दे पर रविवार को टिप्पणी करते हुए कटाक्ष किया था। उन्होंने सवाल उठाया था कि क्या यह केवल सलमान खान का स्वागत था या फिर संघ की ओर से कोई राजनीतिक-सामाजिक संदेश देने की कोशिश।
इस बीच भाजपा नेता और महाराष्ट्र सरकार में मंत्री नितेश राणे भी बहस में कूद पड़े। उन्होंने उद्धव ठाकरे पर निशाना साधते हुए कहा कि सलमान खान उनसे “ज्यादा हिंदू” हैं। राणे ने अभिनेता की सराहना करते हुए कहा कि आरएसएस प्रमुख के कार्यक्रम में शामिल होना साहस का काम है।
आरएसएस कार्यक्रम में सलमान खान की मौजूदगी ने जहां एक ओर समावेशिता और संवाद की चर्चा को हवा दी है, वहीं दूसरी ओर यह मुद्दा महाराष्ट्र की राजनीति में नई बहस का कारण बन गया है।



