नई दिल्ली: दिल्ली उच्च न्यायालय ने द्वारका रोड एक्सीडेंट मामले में आरोपी नाबालिग ड्राइवर के परिवार की ओर से की गई अर्जेंट मेंशनिंग (Urgent Mentioning) को अनुमति दे दी है। परिवार ने अदालत से मीडिया को नाबालिग और उसके परिजनों की पहचान उजागर करने से रोकने के निर्देश जारी करने की मांग की है।बताया जा रहा है कि इस याचिका पर आज दिन में ही सुनवाई होने की संभावना है।
क्या है पूरा मामला?
दिल्ली के द्वारका इलाके में हाल ही में हुए एक सड़क हादसे में एक बाइक सवार की मौत हो गई थी। इस मामले में एक नाबालिग ड्राइवर पर लापरवाही से वाहन चलाने का आरोप है। दुर्घटना के बाद यह मामला तेजी से सुर्खियों में आ गया, जिसके चलते विभिन्न मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर आरोपी नाबालिग और उसके परिवार से जुड़ी जानकारी प्रसारित की जाने लगी।इसी को लेकर नाबालिग के परिवार ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
परिवार ने अदालत से क्या मांग की?
परिवार की ओर से दायर याचिका में मांग की गई है कि:
* मीडिया संस्थानों को नाबालिग की पहचान सार्वजनिक करने से रोका जाए
* परिवार के सदस्यों की फोटो, नाम या अन्य निजी जानकारी का प्रसारण या प्रकाशन न किया जाए
* मामले की रिपोर्टिंग करते समय किशोर न्याय कानूनों का पालन सुनिश्चित किया जाए
* याचिका में कहा गया है कि मीडिया ट्रायल से नाबालिग के मौलिक अधिकारों और भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
कानून क्या कहता है?
भारत में लागू किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम, 2015 के तहत किसी भी नाबालिग आरोपी की पहचान सार्वजनिक करना प्रतिबंधित है। कानून के अनुसार:
* नाबालिग का नाम
* पता
* स्कूल की जानकारी
* फोटो या वीडियो
जैसी किसी भी प्रकार की पहचान उजागर करना दंडनीय अपराध की श्रेणी में आता है।
आज की सुनवाई पर नजर
अब इस मामले में सबकी नजर दिल्ली हाईकोर्ट की संभावित सुनवाई पर टिकी है। यदि अदालत मीडिया पर अस्थायी रोक लगाने का आदेश देती है, तो यह नाबालिग आरोपियों की पहचान से जुड़े मामलों में एक महत्वपूर्ण कानूनी मिसाल बन सकता है।



