वॉशिंगटन, डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ चल रहे तनाव के बीच एक बार फिर कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने साफ कर दिया है कि जब तक ईरान अपना परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह से बंद नहीं करता, तब तक कोई भी शांति समझौता संभव नहीं होगा। साथ ही, अमेरिका द्वारा लागू की गई नौसैनिक नाकेबंदी (Naval Blockade) फिलहाल जारी रहेगी।
‘नाकेबंदी बमबारी से ज्यादा असरदार’
एक इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि ईरान पर लगाई गई नाकेबंदी सैन्य हमलों से भी अधिक प्रभावी साबित हो रही है। उनके मुताबिक, ईरान अपनी तेल आपूर्ति निर्यात नहीं कर पा रहा है, जिससे उसकी अर्थव्यवस्था पर गंभीर दबाव बन रहा है।
ट्रंप ने दावा किया कि:
• ईरान के तेल भंडार और पाइपलाइन पर दबाव बढ़ रहा है
• देश की आर्थिक स्थिति तेजी से बिगड़ रही है
• ईरान अमेरिका के साथ समझौता करना चाहता है
उन्होंने कहा, “वे समझौता करना चाहते हैं, लेकिन मैं नाकेबंदी हटाना नहीं चाहता, क्योंकि मैं नहीं चाहता कि उनके पास परमाणु हथियार हों।”
‘नो न्यूक्लियर वेपन’ ही समझौते की शर्त
ट्रंप ने स्पष्ट किया कि अमेरिका की प्राथमिक शर्त यही है कि ईरान भविष्य में कभी भी परमाणु हथियार विकसित नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि बातचीत जारी है, लेकिन समझौता तभी संभव होगा जब ईरान पूरी तरह झुक जाए।
ईरान की कड़ी चेतावनी
दूसरी ओर, ईरान ने अमेरिकी नाकेबंदी को अपने खिलाफ साजिश बताया है। ईरानी नेतृत्व ने चेतावनी दी है कि इस कदम का “अभूतपूर्व और व्यावहारिक जवाब” दिया जाएगा।
ईरान की संसद के स्पीकर Mohammad Bagher Ghalibaf ने कहा कि:
• अमेरिका आर्थिक दबाव और आंतरिक अस्थिरता पैदा करने की कोशिश कर रहा है
• नाकेबंदी के जरिए ईरान को कमजोर करने की योजना बनाई जा रही है
• यह रणनीति कभी सफल नहीं होगी
मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव
अमेरिका और ईरान के बीच यह टकराव मिडिल ईस्ट में पहले से मौजूद तनाव को और बढ़ा सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर स्थिति नहीं सुधरी, तो यह विवाद बड़े क्षेत्रीय संकट में बदल सकता है।



