लेह, केंद्र सरकार ने लद्दाख में डेयरी उद्योग को मजबूत करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को लेह में 50,000 लीटर प्रतिदिन क्षमता वाले आधुनिक डेयरी प्रोसेसिंग प्लांट की स्थापना की घोषणा की। इस परियोजना पर लगभग 70 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
किसानों की आय बढ़ाने पर फोकस
इस पहल का मुख्य उद्देश्य लेह और कारगिल के किसानों को स्थिर आय प्रदान करना और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में डेयरी सेक्टर को मजबूत बनाना है। सरकार का मानना है कि इससे स्थानीय रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे और क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को नई दिशा मिलेगी।
पशुधन संख्या तीन गुना करने की योजना
गृह मंत्री ने बताया कि हर साल करीब 500 उच्च गुणवत्ता वाले पशुओं को शामिल किया जाएगा। अगले 10 वर्षों में पशुधन की संख्या लगभग तीन गुना करने का लक्ष्य रखा गया है। कठिन जलवायु परिस्थितियों को देखते हुए रिसर्च पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, ताकि नए पशु कम ऑक्सीजन और अत्यधिक ठंड में भी अनुकूल रह सकें।
डेयरी नेटवर्क का विस्तार
National Dairy Development Board के साथ जुड़ने के बाद लद्दाख मिल्क फेडरेशन 28 गांवों तक पहुंच चुका है। सरकार का लक्ष्य इसे बढ़ाकर 85% गांवों तक ले जाना है। वर्तमान में जहां रोजाना 6,000 लीटर दूध की खरीद होती है, उसे बढ़ाकर 21,000 लीटर तक पहुंचाने की योजना है।
सेना और ITBP से मिलेगा बड़ा बाजार
सरकार Indian Army और Indo-Tibetan Border Police के साथ समझौते कर रही है, जहां करीब 18,000 जवान तैनात हैं। इससे डेयरी उत्पादों के लिए स्थायी बाजार सुनिश्चित होगा।
कारगिल में भी नया डेयरी प्लांट
Kargil में 10,000 लीटर प्रतिदिन क्षमता वाले डेयरी प्लांट की नींव रखी गई है, जिसकी लागत लगभग 25 करोड़ रुपये है। यह परियोजना ऊंचाई वाले क्षेत्रों में डेयरी सप्लाई चेन को मजबूत करेगी।
महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा
स्थानीय महिलाओं की भागीदारी को सराहते हुए मंत्री ने कहा कि डेयरी सहकारी समितियों में उनका योगदान महत्वपूर्ण है। वर्तमान में यहां प्रतिदिन करीब 500 किलोग्राम पनीर और 1,000 किलोग्राम दही का उत्पादन हो रहा है।
टेक्नोलॉजी से गुणवत्ता में सुधार
डेयरी सेक्टर को आधुनिक बनाने के लिए मोबाइल मिल्क टेस्टिंग यूनिट और डिजिटल ऑटोमेटेड मिल्क कलेक्शन सिस्टम लागू किए जाएंगे। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और उत्पादों की गुणवत्ता बेहतर होगी।
अन्य क्षेत्रों में भी संभावनाएं
सरकार ने शहद उत्पादन और ऑर्गेनिक खेती जैसे सहायक क्षेत्रों को भी बढ़ावा देने की बात कही है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को और मजबूती मिलेगी।



