मुंबई: महाराष्ट्र सरकार में मंत्री और भाजपा नेता नितेश राणे ने राज्य में कथित “कॉर्पोरेट जिहाद” का मुद्दा उठाते हुए बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में “जिहादी गतिविधियों” को रोकने के लिए नौकरियों में केवल हिंदू उम्मीदवारों को प्राथमिकता देने की मांग उठ रही है।
यह बयान नासिक स्थित Tata Consultancy Services (TCS) की एक बीपीओ यूनिट में सामने आए कथित धर्मांतरण प्रयास और यौन उत्पीड़न के मामलों के संदर्भ में आया है।
क्या है पूरा मामला?
नासिक पुलिस ने इस मामले में टीसीएस के 8 कर्मचारियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें 7 पुरुष और 1 महिला प्रबंधक शामिल हैं। एक अन्य महिला कर्मचारी फिलहाल फरार बताई जा रही है।
वहीं, National Commission for Women (NCW) ने भी मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच के लिए एक फैक्ट-फाइंडिंग कमेटी का गठन किया है।
राणे के बयान के मुख्य बिंदु
मंत्री नितेश राणे का दावा है कि कुछ जगहों पर नौकरियों का उपयोग धर्मांतरण के साधन के रूप में किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि “कॉरपोरेट सेक्टर का इस्तेमाल अगर किसी समुदाय को निशाना बनाने के लिए हो रहा है, तो इसका कड़ा जवाब जरूरी है।”
राणे के मुताबिक, ऐसी घटनाओं से हिंदू समुदाय में असंतोष बढ़ रहा है और लोग अपने समुदाय के भीतर ही रोजगार और व्यापार को प्राथमिकता देने की सोच रहे हैं।
‘हिंदू उम्मीदवारों को प्राथमिकता’ पर बयान
राणे ने यह भी कहा कि भविष्य में कंपनियां ऐसी गतिविधियों को रोकने के लिए केवल हिंदू उम्मीदवारों को नौकरी देने जैसी नीतियों पर विचार कर सकती हैं।
उन्होंने अपने बयान में यह स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य समाज को बांटना नहीं, बल्कि “जमीनी अनुभवों के आधार पर प्रतिक्रिया देना” है।
बढ़ सकता है राजनीतिक विवाद
राणे का यह बयान राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बहस को जन्म दे सकता है, क्योंकि इसमें रोजगार और धर्म को जोड़ने की बात कही गई है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और तेज होने की संभावना है।



