नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और अमेरिका-ईरान वार्ता के बीच पाकिस्तान की भूमिका को लेकर भारत की राजनीति गरमा गई है। कांग्रेस पार्टी ने इस मुद्दे पर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर सवाल उठाए हैं और उसकी विदेश नीति को लेकर गंभीर चिंताएं जताई हैं।
कांग्रेस का आरोप: पाकिस्तान को क्यों मिला मौका?
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच हो रही बातचीत से यह सवाल उठता है कि आखिर पाकिस्तान को इस स्तर की कूटनीतिक भूमिका कैसे मिल गई। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि “हाउडी मोदी” और “नमस्ते ट्रंप” जैसे बड़े आयोजनों के बावजूद भारत पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मंच पर अलग-थलग करने में नाकाम रहा है।
पहलगाम हमले के बाद कूटनीति पर सवाल
रमेश ने अप्रैल 2025 में हुए पहलगाम आतंकी हमले का जिक्र करते हुए कहा कि इस घटना के बाद भारत को पाकिस्तान के खिलाफ मजबूत वैश्विक दबाव बनाना चाहिए था। लेकिन इसके विपरीत, पाकिस्तान अब अंतरराष्ट्रीय वार्ताओं में सक्रिय भूमिका निभा रहा है, जो भारत की कूटनीतिक विफलता को दर्शाता है।
2008 मुंबई हमलों से तुलना
कांग्रेस ने इस स्थिति की तुलना 2008 के मुंबई आतंकवादी हमले के बाद की गई कूटनीति से की। पार्टी का कहना है कि उस समय तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की सरकार ने पाकिस्तान को वैश्विक स्तर पर प्रभावी तरीके से अलग-थलग कर दिया था।
अमेरिका के साथ संबंधों पर भी उठे सवाल
कांग्रेस नेता ने यह भी सवाल उठाया कि अमेरिका के साथ मजबूत संबंधों और बड़े आयोजनों के बावजूद भारत यह सुनिश्चित क्यों नहीं कर सका कि पाकिस्तान को ऐसी भूमिका न मिले। उन्होंने कहा कि भारत ने व्यापार समझौतों में भी झुकाव दिखाया, लेकिन उसके बदले कोई ठोस लाभ नहीं मिला।
BRICS और क्षेत्रीय भूमिका पर प्रश्न
भारत की वैश्विक भूमिका पर सवाल उठाते हुए रमेश ने पूछा कि ‘ब्रिक्स प्लस’ के अध्यक्ष के रूप में भारत ने पश्चिम एशिया में शांति स्थापित करने के लिए कोई पहल क्यों नहीं की। खासकर तब, जब ईरान, संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब जैसे देश इस समूह का हिस्सा हैं।
चीन और पाकिस्तान के संबंधों पर चिंता
कांग्रेस ने चीन के साथ भारत के संबंधों पर भी सवाल उठाए। पार्टी का कहना है कि पिछले कुछ समय में चीन के प्रति भारत की नरम नीति का कोई ठोस फायदा नहीं हुआ, जबकि चीन पाकिस्तान के साथ सहयोग बढ़ाता रहा है।



