नई दिल्ली: राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने देश की टेलीकॉम कंपनियों की डेटा नीति पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा है कि उपभोक्ताओं द्वारा खरीदा गया मोबाइल डेटा अगर इस्तेमाल नहीं होता, तो वह दिन खत्म होते ही समाप्त हो जाता है, जो कि उपभोक्ताओं के साथ अन्याय है।
क्या बोले राघव चड्ढा?
राघव चड्ढा ने कहा कि टेलीकॉम कंपनियां 1.5GB, 2GB या 3GB प्रतिदिन डेटा देती हैं, जो हर 24 घंटे में रीसेट हो जाता है।
https://x.com/i/status/2035995125260890443
उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि अगर किसी यूजर ने 2GB डेटा प्लान लिया और केवल 1.5GB ही इस्तेमाल किया, तो बचा हुआ 0.5GB डेटा आधी रात को खत्म हो जाता है।
उन्होंने इसे कंपनियों की एक तय नीति बताते हुए सवाल उठाया कि जब उपभोक्ता पूरा भुगतान करते हैं, तो उन्हें पूरा लाभ क्यों नहीं मिलता।
सांसद में उठाया मुद्दा
सांसद ने इस विषय को संसद में उठाते हुए कहा कि:
* उपभोक्ताओं के साथ यह व्यवस्था उचित नहीं है
* बचा हुआ डेटा अगले दिन के लिए जोड़ा जाना चाहिए
* कंपनियों को “डेटा रोलओवर” सुविधा लागू करनी चाहिए
कैसे काम करते हैं मौजूदा डेटा प्लान?
देश में ज्यादातर प्रीपेड मोबाइल प्लान इस तरह काम करते हैं:
* हर दिन तय मात्रा में डेटा मिलता है
* 24 घंटे बाद डेटा रीसेट हो जाता है
* बचा हुआ डेटा समाप्त हो जाता है
यानी “यूज करो या खो दो” (Use it or lose it) का नियम लागू होता है।
क्या है डेटा रोलओवर?
डेटा रोलओवर का मतलब है कि अगर किसी दिन डेटा बच जाता है, तो वह अगले दिन या अगले बिलिंग चक्र में जुड़ जाए।
यह सुविधा भारत में फिलहाल सीमित है और मुख्य रूप से कुछ पोस्टपेड प्लान्स में ही मिलती है।
कंपनियों का पक्ष
विशेषज्ञों के मुताबिक, टेलीकॉम कंपनियां इस नीति को बनाए रखने के पीछे कई कारण देती हैं:
* नेटवर्क पर अतिरिक्त दबाव से बचाव
* सस्ते प्लान्स उपलब्ध कराना
* व्यावसायिक मॉडल के तहत लाभ बनाए रखना
नियामक की भूमिका
देश में टेलीकॉम सेक्टर को Telecom Regulatory Authority of India (TRAI) नियंत्रित करता है।
फिलहाल डेटा रोलओवर को लेकर कोई अनिवार्य नियम नहीं है, लेकिन इस मुद्दे के बढ़ने पर भविष्य में बदलाव संभव है।



