ढाका/नई दिल्ली: बांग्लादेश की राजनीति में लंबे समय तक ‘डार्क प्रिंस’ कहे जाने वाले तारिक रहमान ने आखिरकार सत्ता की दहलीज पार कर ली है। उनकी पार्टी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) ने आम चुनाव में निर्णायक जीत दर्ज की है और अब तारिक रहमान के प्रधानमंत्री बनने की संभावना प्रबल मानी जा रही है
भारत ने आधिकारिक नतीजों से पहले ही उन्हें बधाई देकर यह संकेत दे दिया कि वह ढाका के साथ रिश्तों को नई दिशा देने के लिए उत्सुक है। 2024 में शेख हसीना के सत्ता से बाहर होने के बाद दोनों देशों के संबंधों में आई ठंडक को देखते हुए यह कूटनीतिक कदम अहम माना जा रहा है।
भारत-बांग्लादेश संबंध: दो समानांतर ट्रैक
तारिक रहमान ऐसे समय सत्ता संभालने जा रहे हैं जब भारत-बांग्लादेश संबंध दो अलग-अलग धाराओं में बह रहे हैं।
दोनों देशों के बीच करीब 4,000 किमी लंबी सीमा है।
व्यापार, बिजली आपूर्ति और कनेक्टिविटी के स्तर पर गहरे रिश्ते हैं।
रेल सेवा Maitree Express दोनों देशों की दोस्ती का प्रतीक रही है।
हालांकि, 2024 के छात्र आंदोलन के बाद शेख हसीना के भारत आने से बांग्लादेश में खासकर युवाओं के बीच भारत को लेकर संदेह बढ़ा है। ऐसे माहौल में रिश्तों को संतुलित रखना तारिक के लिए बड़ी चुनौती होगी।
भारत की सक्रिय कूटनीति
भारत ने पिछले एक साल में बीएनपी नेतृत्व से संपर्क बढ़ाया है।
प्रधानमंत्री Narendra Modi ने तारिक की मां और पूर्व पीएम Khaleda Zia की बीमारी के दौरान चिंता जताई और सहयोग की पेशकश की थी।
विदेश मंत्री S. Jaishankar 2024 के राजनीतिक घटनाक्रम के बाद ढाका पहुंचने वाले पहले भारतीय नेता बने और उन्होंने तारिक से मुलाकात की।
इन घटनाओं ने संकेत दिया कि नई दिल्ली संभावित सत्ता परिवर्तन के लिए पहले से तैयार थी।
भारत पर क्या है तारिक रहमान का रुख?
लंबे समय तक अपने माता-पिता की राजनीतिक छाया में रहे तारिक ने हाल के महीनों में अलग और संतुलित छवि पेश करने की कोशिश की है। उनका बयान – “न दिल्ली, न पिंडी, सबसे पहले बांग्लादेश” – इस बात का संकेत है कि वे भारत या पाकिस्तान में से किसी एक के पक्ष में खुलकर झुकाव नहीं दिखाना चाहते।
हालिया हिंसा और अल्पसंख्यकों पर हमलों के बीच उन्होंने समावेशी राजनीति की बात कही। उनका बयान – “धर्म व्यक्ति का विषय है, राज्य सबका है” – अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय (करीब 8%) के लिए आश्वस्ति का संकेत माना गया।
फिर भी, वे कुछ मुद्दों पर सख्त रुख रखते दिखे हैं:
सीमा पर होने वाली हत्याओं को खत्म करने का वादा
तीस्ता और पद्मा नदी जल बंटवारे को “राष्ट्रीय अस्तित्व” का सवाल बताया।
‘डार्क प्रिंस’ का अतीत
तारिक रहमान का राजनीतिक अतीत विवादों से भरा रहा है। 2001-2006 के बीच जब बीएनपी सत्ता में थी और भारत में Atal Bihari Vajpayee के नेतृत्व में सरकार थी, तब दोनों देशों के रिश्ते तनावपूर्ण रहे।
उस दौरान:
* ढाका पर पूर्वोत्तर उग्रवादी संगठनों को पनाह देने के आरोप लगे।
* 2004 के चिटगांव हथियार तस्करी मामले में तारिक का नाम सामने आया।
* अमेरिकी राजनयिक केबल में उन्हें “डार्क प्रिंस” कहा गया।
हालांकि, 2024 में शेख हसीना की सत्ता से विदाई के बाद वे कई मामलों में बरी हो चुके हैं, जिनमें 2004 का ग्रेनेड हमला मामला भी शामिल है।
क्या बदलेगा भारत-बांग्लादेश समीकरण?
करीब 16 साल सत्ता से दूर रहने के बावजूद तारिक ने पार्टी संगठन को जीवित रखा। हाल के भाषणों में वे खुद को एक व्यवहारिक और सुधारवादी नेता के रूप में पेश कर रहे हैं।

