मुंबई: महाराष्ट्र में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को पिछले कुछ महीनों से मानदेय नहीं मिलने की समस्या गंभीर होती जा रही है। जयंत पाटिल ने दावा किया है कि केंद्र सरकार द्वारा अपने हिस्से की राशि जारी न किए जाने के कारण राज्य के लाखों कार्यकर्ताओं को आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है।
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के वरिष्ठ नेता पाटिल के अनुसार, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता बच्चों के पोषण, महिलाओं के स्वास्थ्य और समाज के कमजोर वर्गों के विकास में अहम भूमिका निभाते हैं, लेकिन उन्हें समय पर उनका मेहनताना नहीं मिल रहा है।
मानदेय में देरी से बढ़ी परेशानी
पाटिल ने बताया कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को हर महीने लगभग 13,000 रुपये और सहायिकाओं को 7,500 रुपये मिलते हैं। इसमें केंद्र सरकार का योगदान क्रमशः 4,500 रुपये और 3,500 रुपये होता है। उनका आरोप है कि पिछले तीन महीनों से केंद्र सरकार का यह हिस्सा जारी नहीं किया गया है।
इस देरी का असर महाराष्ट्र के करीब 1.5 लाख आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं पर पड़ा है, जिससे उनकी रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना मुश्किल हो गया है।
“काम बढ़ रहा, लेकिन भुगतान नहीं”
पाटिल ने कहा कि आंगनवाड़ी कर्मचारियों पर लगातार काम और जिम्मेदारियों का बोझ बढ़ रहा है, लेकिन इसके बावजूद उन्हें समय पर भुगतान नहीं मिल रहा। उन्होंने इसे अन्यायपूर्ण बताते हुए सरकार से तत्काल कार्रवाई की मांग की।
केंद्र सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
पाटिल ने केंद्र सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि “डबल इंजन सरकार” का दावा करने वाली व्यवस्था में समन्वय की कमी साफ दिखाई दे रही है। उन्होंने इसे प्रशासनिक विफलता करार दिया।
इसके अलावा, उन्होंने आरोप लगाया कि जल जीवन मिशन और प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना जैसी कई केंद्र प्रायोजित योजनाओं के लिए भी राज्य को समय पर फंड नहीं मिल रहा है, जिससे विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं।



