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मिडिल ईस्ट संकट पर सर्वदलीय बैठक जारी: TMC का बहिष्कार, राहुल गांधी भी शामिल नहीं हुए
नई दिल्ली, पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में बढ़ते तनाव के बीच केंद्र सरकार द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक जारी है। इस अहम बैठक में क्षेत्र की मौजूदा स्थिति, उसके वैश्विक प्रभाव और भारत पर पड़ने वाले संभावित असर पर चर्चा की जा रही है। हालांकि, इस बैठक से तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने दूरी बना ली है, जबकि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी भी इसमें शामिल नहीं हुए।
TMC ने किया बहिष्कार
TMC सांसद सौगत रॉय ने स्पष्ट कहा कि उनकी पार्टी भाजपा के साथ किसी भी बैठक में शामिल नहीं होगी। उन्होंने कहा, “हमारी राजनीतिक लड़ाई बीजेपी के साथ है, ऐसे में हम उनके साथ बैठक में क्यों बैठें?”
राहुल गांधी का सरकार पर हमला
बैठक से एक दिन पहले राहुल गांधी ने अपनी अनुपस्थिति की जानकारी दी थी। उन्होंने विदेश नीति को लेकर केंद्र सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि यह “निजी नीति” बन गई है और इससे देश की स्थिति प्रभावित हो सकती है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भारत की विदेश नीति स्वतंत्र नहीं दिख रही।
राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में बैठक
सर्वदलीय बैठक की अध्यक्षता रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह कर रहे हैं। बैठक में गृहमंत्री अमित शाह, भाजपा अध्यक्ष जे .पी. नड्डा समेत कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए।
इसके अलावा, बैठक में विभिन्न दलों और सरकार के प्रमुख प्रतिनिधि मौजूद रहे, जिनमें से. जयशंकर, हरदीप सिंह पूरी और अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं।
केंद्र सरकार की तैयारी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्यसभा में जानकारी दी कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष को देखते हुए सात अधिकार प्राप्त समूहों का गठन किया गया है। ये समूह एलपीजी, आवश्यक सेवाओं और अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों की निगरानी करेंगे।
सरकार ने यह भी आश्वासन दिया है कि देश में तेल और गैस की कोई कमी नहीं है और आपूर्ति पूरी तरह नियंत्रण में है।
क्या है बैठक का उद्देश्य?
इस सर्वदलीय बैठक का मुख्य उद्देश्य मिडिल ईस्ट संकट पर राजनीतिक सहमति बनाना, विपक्ष के सुझाव लेना और भारत के हितों की रक्षा के लिए रणनीति तैयार करना है।
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब वैश्विक स्तर पर बढ़ते तनाव का असर ऊर्जा आपूर्ति, व्यापार और कूटनीतिक संबंधों पर पड़ सकता है। भारत सरकार स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।

