नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल में लंबे समय से केंद्र और राज्य सरकार के बीच टकराव के कारण कई केंद्रीय योजनाएं पूरी तरह लागू नहीं हो पाई हैं। अब राजनीतिक माहौल बदलने की संभावनाओं के बीच यह मुद्दा फिर से चर्चा में है।
चुनाव के दौरान भी यह एक बड़ा मुद्दा रहा कि राज्य की जनता को केंद्र सरकार की कई कल्याणकारी योजनाओं का पूरा लाभ नहीं मिल रहा। ऐसे में अगर सत्ता परिवर्तन होता है, तो इन योजनाओं को तेजी से लागू करने की बात कही जा रही है।
ये हैं केंद्र की 7 प्रमुख योजनाएं जो चर्चा में हैं
1. आयुष्मान भारत योजना
यह देश की सबसे बड़ी स्वास्थ्य बीमा योजना मानी जाती है। इसके तहत गरीब परिवारों को सालाना 5 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज मिलता है।
पश्चिम बंगाल में इस योजना की जगह राज्य सरकार अपनी ‘स्वास्थ्य साथी’ योजना चला रही है, जिसके कारण आयुष्मान भारत लागू नहीं हो पाया।
2. पीएम मत्स्य संपदा योजना
यह योजना मछुआरों के विकास और उनके आर्थिक सशक्तिकरण के लिए शुरू की गई है।
आरोप है कि राज्य में इस योजना का लाभ मछुआरा समुदाय तक पूरी तरह नहीं पहुंच सका।
3. पीएम श्री स्कूल योजना
देशभर में शिक्षा को आधुनिक बनाने के लिए पीएम श्री स्कूल खोले जा रहे हैं।
पश्चिम बंगाल में इस योजना को मंजूरी नहीं मिलने की वजह से इसका विस्तार सीमित रहा।
4. पीएम आवास योजना (ग्रामीण और शहरी)
इस योजना के तहत गरीबों को पक्के घर दिए जाते हैं।
राज्य में फंडिंग और क्रियान्वयन को लेकर विवाद के कारण इसकी गति प्रभावित हुई।
इसके साथ ही मनरेगा (MGNREGA) भुगतान को लेकर भी केंद्र और राज्य के बीच मतभेद सामने आए।
5. पीएम फसल बीमा योजना
यह योजना किसानों को फसल नुकसान की स्थिति में आर्थिक सुरक्षा देती है।
पश्चिम बंगाल सरकार ने इस योजना से बाहर रहने का फैसला किया था, जिससे किसानों को इसका लाभ नहीं मिल पाया।
6. पीएम विश्वकर्मा योजना
कारीगरों और हस्तशिल्पियों के लिए बनाई गई इस योजना के तहत ट्रेनिंग, लोन और तकनीकी सहायता दी जाती है।
राज्य में इसके क्रियान्वयन की रफ्तार धीमी रही है।
7. चाय श्रमिक प्रोत्साहन योजना
उत्तर बंगाल के चाय बागान श्रमिकों के लिए यह योजना बेहद महत्वपूर्ण है।
राजनीतिक कारणों से यह योजना भी पूरी तरह लागू नहीं हो सकी।
अन्य योजनाएं भी रहीं विवाद में
इसके अलावा पीएम किसान सम्मान निधि, जन धन योजना, और स्मार्ट सिटी मिशन जैसी योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर भी केंद्र और राज्य के बीच आरोप-प्रत्यारोप होते रहे हैं।
चुनावी वादे और भविष्य की संभावनाएं
चुनावी वादों में महिलाओं को मासिक आर्थिक सहायता और सरकारी नौकरियों में 33% आरक्षण जैसे मुद्दे भी शामिल किए गए हैं।
अगर ये योजनाएं लागू होती हैं, तो राज्य में सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा को मजबूती मिल सकती है।



